12 अप्रैल 2040 को नई दिल्ली का पंचांग

गुरुवार, 12 अप्रैल 2040, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 12 अप्रैल 2040 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल प्रतिपदा (19:24 तक), नक्षत्र अश्विनी (00:02, 13 अप्रैल तक) और योग विष्कंभ है। सूर्योदय 05:58 पर और सूर्यास्त 18:45 पर है। राहुकाल 13:57 से 15:33 तक है।

दिन और रात
दिन 05:58 – 18:45
रात 05:57 तक
तिथि
प्रतिपदा, 19:24 तक
द्वितीया
नक्षत्र
अश्विनी, 00:02 तक
भरणी
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

12 अप्रैल 2040 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
शुक्ल प्रतिपदा 19:24 तक
शुक्ल द्वितीया 19:54, 13 अप्रैल तक
नक्षत्र
अश्विनी 00:02, 13 अप्रैल तक
भरणी 01:17, 14 अप्रैल तक
योग
विष्कंभअशुभ 01:42, 13 अप्रैल तक
प्रीति 01:09, 14 अप्रैल तक
करण
किंस्तुघ्न 07:22 तक
बव 19:24 तक
बालव 07:34, 13 अप्रैल तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमीन
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:58
सूर्यास्त
18:45
चंद्रोदय
06:30
चंद्रास्त
19:34
दिनमान
12h 47m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
चैत्र
मास (पूर्णिमांत)
चैत्र
विक्रम संवत
2097
शक संवत
1962, रौद्र संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:28 – 05:13
अभिजीत मुहूर्त
11:56 – 12:47

अशुभ समय

राहुकाल
13:57 – 15:33
यमगंड
05:58 – 07:34
गुलिक काल
09:10 – 10:46

12 अप्रैल 2040 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ05:58 – 07:34शुभ
रोग07:34 – 09:10टालें
उद्वेग09:10 – 10:46टालें
चर10:46 – 12:22सामान्य
लाभ12:22 – 13:57शुभ
अमृत13:57 – 15:33शुभ
काल15:33 – 17:09टालें
शुभ17:09 – 18:45शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत18:45 – 20:09शुभ
चर20:09 – 21:33सामान्य
रोग21:33 – 22:57टालें
काल22:57 – 00:21टालें
लाभ00:21 – 01:45शुभ
उद्वेग01:45 – 03:09टालें
शुभ03:09 – 04:33शुभ
अमृत04:33 – 05:57शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु05:5807:02दिन
मंगल07:0208:06दिन
सूर्य08:0609:10दिन
शुक्र09:1010:14दिन
बुध10:1411:18दिन
चंद्र11:1812:22दिन
शनि12:2213:25दिन
गुरु13:2514:29दिन
मंगल14:2915:33दिन
सूर्य15:3316:37दिन
शुक्र16:3717:41दिन
बुध17:4118:45दिन
चंद्र18:4519:41रात
शनि19:4120:37रात
गुरु20:3721:33रात
मंगल21:3322:29रात
सूर्य22:2923:25रात
शुक्र23:2500:21रात
बुध00:2101:17रात
चंद्र01:1702:13रात
शनि02:1303:09रात
गुरु03:0904:05रात
मंगल04:0505:01रात
सूर्य05:0105:57रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
13 अप्रैल 2040मेष संक्रांतिसूर्य का मेष में प्रवेश
15 अप्रैल 2040विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
23 अप्रैल 2040शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
25 अप्रैल 2040प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
27 अप्रैल 2040चैत्र पूर्णिमापूर्णिमा
30 अप्रैल 2040संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
4 मई 2040कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
7 मई 2040कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
9 मई 2040प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
11 मई 2040वैशाख अमावस्याअमावस्या

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.4197° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।