8 अगस्त 2041 को नई दिल्ली का पंचांग

गुरुवार, 8 अगस्त 2041, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 8 अगस्त 2041 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल एकादशी (20:19 तक), नक्षत्र ज्येष्ठा (13:28 तक) और योग वैधृति है। सूर्योदय 05:46 पर और सूर्यास्त 19:06 पर है। राहुकाल 14:06 से 15:46 तक है।

दिन और रात
दिन 05:46 – 19:06
रात 05:47 तक
तिथि
एकादशी, 20:19 तक
द्वादशी
नक्षत्र
ज्येष्ठा, 13:28 तक
मूल
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

8 अगस्त 2041 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
शुक्ल एकादशी 20:19 तक
शुक्ल द्वादशी 17:55, 9 अग॰ तक
नक्षत्र
मूल 12:03, 9 अग॰ तक
योग
वैधृतिअशुभ 02:40, 9 अग॰ तक
विष्कंभअशुभ 23:29, 9 अग॰ तक
करण
वणिज 09:15 तक
विष्टि (भद्रा) 20:19 तक
बव 07:12, 9 अग॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकर्क
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:46
सूर्यास्त
19:06
चंद्रोदय
15:58
चंद्रास्त
01:16
दिनमान
13h 20m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
श्रावण
विक्रम संवत
2098
शक संवत
1963, दुर्मति संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:21 – 05:04
अभिजीत मुहूर्त
11:59 – 12:53

अशुभ समय

राहुकाल
14:06 – 15:46
यमगंड
05:46 – 07:26
गुलिक काल
09:06 – 10:46

8 अगस्त 2041 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ05:46 – 07:26शुभ
रोग07:26 – 09:06टालें
उद्वेग09:06 – 10:46टालें
चर10:46 – 12:26सामान्य
लाभ12:26 – 14:06शुभ
अमृत14:06 – 15:46शुभ
काल15:46 – 17:26टालें
शुभ17:26 – 19:06शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत19:06 – 20:26शुभ
चर20:26 – 21:46सामान्य
रोग21:46 – 23:06टालें
काल23:06 – 00:26टालें
लाभ00:26 – 01:47शुभ
उद्वेग01:47 – 03:07टालें
शुभ03:07 – 04:27शुभ
अमृत04:27 – 05:47शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु05:4606:53दिन
मंगल06:5308:00दिन
सूर्य08:0009:06दिन
शुक्र09:0610:13दिन
बुध10:1311:19दिन
चंद्र11:1912:26दिन
शनि12:2613:33दिन
गुरु13:3314:39दिन
मंगल14:3915:46दिन
सूर्य15:4616:53दिन
शुक्र16:5317:59दिन
बुध17:5919:06दिन
चंद्र19:0619:59रात
शनि19:5920:53रात
गुरु20:5321:46रात
मंगल21:4622:40रात
सूर्य22:4023:33रात
शुक्र23:3300:26रात
बुध00:2601:20रात
चंद्र01:2002:13रात
शनि02:1303:07रात
गुरु03:0704:00रात
मंगल04:0004:53रात
सूर्य04:5305:47रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
8 अग॰ 2041शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
10 अग॰ 2041प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
12 अग॰ 2041श्रावण पूर्णिमापूर्णिमा
15 अग॰ 2041संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
17 अग॰ 2041सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश
19 अग॰ 2041कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
22 अग॰ 2041कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
24 अग॰ 2041प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
26 अग॰ 2041भाद्रपद अमावस्याअमावस्या
30 अग॰ 2041विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
6 सित॰ 2041शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.4382° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।