17 अप्रैल 2042 को नई दिल्ली का पंचांग

गुरुवार, 17 अप्रैल 2042, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 17 अप्रैल 2042 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण द्वादशी (18:24 तक), नक्षत्र शतभिषा (06:46 तक) और योग ब्रह्म है। सूर्योदय 05:53 पर और सूर्यास्त 18:48 पर है। राहुकाल 13:57 से 15:34 तक है।

दिन और रात
दिन 05:53 – 18:48
रात 05:52 तक
तिथि
द्वादशी, 18:24 तक
त्रयोदशी
नक्षत्र
पूर्वा भाद्रपद, 04:15 तक
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

17 अप्रैल 2042 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण द्वादशी 18:24 तक
कृष्ण त्रयोदशी 14:58, 18 अप्रैल तक
नक्षत्र
शतभिषा 06:46 तक
पूर्वा भाद्रपद 04:15, 18 अप्रैल तक
उत्तरा भाद्रपद 01:31, 19 अप्रैल तक
योग
ब्रह्म 22:50 तक
इंद्र 18:50, 18 अप्रैल तक
करण
कौलव 08:01 तक
तैतिल 18:24 तक
गर 04:43, 18 अप्रैल तक
वणिज 14:58, 18 अप्रैल तक
चंद्र राशि
कुंभ 22:54 तक
सूर्य राशिमेष
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:53
सूर्यास्त
18:48
चंद्रोदय
04:05
चंद्रास्त
15:51
दिनमान
12h 54m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
चैत्र
मास (पूर्णिमांत)
वैशाख
विक्रम संवत
2099
शक संवत
1964, दुंदुभि संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:24 – 05:09
अभिजीत मुहूर्त
11:55 – 12:46

अशुभ समय

राहुकाल
13:57 – 15:34
यमगंड
05:53 – 07:30
गुलिक काल
09:07 – 10:44

17 अप्रैल 2042 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ05:53 – 07:30शुभ
रोग07:30 – 09:07टालें
उद्वेग09:07 – 10:44टालें
चर10:44 – 12:20सामान्य
लाभ12:20 – 13:57शुभ
अमृत13:57 – 15:34शुभ
काल15:34 – 17:11टालें
शुभ17:11 – 18:48शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत18:48 – 20:11शुभ
चर20:11 – 21:34सामान्य
रोग21:34 – 22:57टालें
काल22:57 – 00:20टालें
लाभ00:20 – 01:43शुभ
उद्वेग01:43 – 03:06टालें
शुभ03:06 – 04:29शुभ
अमृत04:29 – 05:52शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु05:5306:58दिन
मंगल06:5808:02दिन
सूर्य08:0209:07दिन
शुक्र09:0710:11दिन
बुध10:1111:16दिन
चंद्र11:1612:20दिन
शनि12:2013:25दिन
गुरु13:2514:29दिन
मंगल14:2915:34दिन
सूर्य15:3416:39दिन
शुक्र16:3917:43दिन
बुध17:4318:48दिन
चंद्र18:4819:43रात
शनि19:4320:38रात
गुरु20:3821:34रात
मंगल21:3422:29रात
सूर्य22:2923:25रात
शुक्र23:2500:20रात
बुध00:2001:15रात
चंद्र01:1502:11रात
शनि02:1103:06रात
गुरु03:0604:02रात
मंगल04:0204:57रात
सूर्य04:5705:52रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
18 अप्रैल 2042प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
20 अप्रैल 2042वैशाख अमावस्याअमावस्या
23 अप्रैल 2042विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
30 अप्रैल 2042शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
2 मई 2042प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
5 मई 2042वैशाख पूर्णिमापूर्णिमा
9 मई 2042संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
13 मई 2042कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
15 मई 2042कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
15 मई 2042वृषभ संक्रांतिसूर्य का वृषभ में प्रवेश

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.4479° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।