20 मार्च 2043 को नई दिल्ली का पंचांग

शुक्रवार, 20 मार्च 2043, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 20 मार्च 2043 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल दशमी (16:00 तक), नक्षत्र पुनर्वसु (12:31 तक) और योग शोभन है। सूर्योदय 06:25 पर और सूर्यास्त 18:32 पर है। राहुकाल 10:58 से 12:28 तक है।

दिन और रात
दिन 06:25 – 18:32
रात 06:24 तक
तिथि
दशमी, 16:00 तक
एकादशी
नक्षत्र
पुनर्वसु, 12:31 तक
पुष्य
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

20 मार्च 2043 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल दशमी 16:00 तक
शुक्ल एकादशी 15:51, 21 मार्च तक
नक्षत्र
पुष्य 12:56, 21 मार्च तक
योग
शोभन 09:32 तक
अतिगंडअशुभ 08:10, 21 मार्च तक
करण
गर 16:00 तक
वणिज 03:52, 21 मार्च तक
विष्टि (भद्रा) 15:51, 21 मार्च तक
चंद्र राशि
मिथुन 06:29 तक
सूर्य राशिमीन
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:25
सूर्यास्त
18:32
चंद्रोदय
13:37
चंद्रास्त
03:16
दिनमान
12h 7m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2099
शक संवत
1964, दुंदुभि संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:50 – 05:38
अभिजीत मुहूर्त
12:04 – 12:53

अशुभ समय

राहुकाल
10:58 – 12:28
यमगंड
15:30 – 17:01
गुलिक काल
07:56 – 09:27

20 मार्च 2043 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर06:25 – 07:56सामान्य
लाभ07:56 – 09:27शुभ
अमृत09:27 – 10:58शुभ
काल10:58 – 12:28टालें
शुभ12:28 – 13:59शुभ
रोग13:59 – 15:30टालें
उद्वेग15:30 – 17:01टालें
चर17:01 – 18:32सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग18:32 – 20:01टालें
काल20:01 – 21:30टालें
लाभ21:30 – 22:59शुभ
उद्वेग22:59 – 00:28टालें
शुभ00:28 – 01:57शुभ
अमृत01:57 – 03:26शुभ
चर03:26 – 04:55सामान्य
रोग04:55 – 06:24टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र06:2507:26दिन
बुध07:2608:26दिन
चंद्र08:2609:27दिन
शनि09:2710:27दिन
गुरु10:2711:28दिन
मंगल11:2812:28दिन
सूर्य12:2813:29दिन
शुक्र13:2914:30दिन
बुध14:3015:30दिन
चंद्र15:3016:31दिन
शनि16:3117:31दिन
गुरु17:3118:32दिन
मंगल18:3219:31रात
सूर्य19:3120:30रात
शुक्र20:3021:30रात
बुध21:3022:29रात
चंद्र22:2923:29रात
शनि23:2900:28रात
गुरु00:2801:27रात
मंगल01:2702:27रात
सूर्य02:2703:26रात
शुक्र03:2604:25रात
बुध04:2505:25रात
चंद्र05:2506:24रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
21 मार्च 2043शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
23 मार्च 2043प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
25 मार्च 2043फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा
29 मार्च 2043संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
3 अप्रैल 2043कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
6 अप्रैल 2043कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
8 अप्रैल 2043प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
9 अप्रैल 2043चैत्र अमावस्याअमावस्या
13 अप्रैल 2043विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
14 अप्रैल 2043मेष संक्रांतिसूर्य का मेष में प्रवेश

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.4607° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।