30 अप्रैल 2043 को नई दिल्ली का पंचांग

गुरुवार, 30 अप्रैल 2043, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 30 अप्रैल 2043 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण षष्ठी (01:36, 1 मई तक), नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा (23:11 तक) और योग सिद्ध है। सूर्योदय 05:41 पर और सूर्यास्त 18:55 पर है। राहुकाल 13:57 से 15:37 तक है।

दिन और रात
दिन 05:41 – 18:55
रात 05:40 तक
तिथि
षष्ठी, 01:36 तक
सप्तमी
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा, 23:11 तक
उत्तराषाढ़ा
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

30 अप्रैल 2043 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण षष्ठी 01:36, 1 मई तक
कृष्ण सप्तमी 02:21, 2 मई तक
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा 00:37, 2 मई तक
योग
सिद्ध 18:44 तक
साध्य 18:27, 1 मई तक
करण
गर 13:00 तक
वणिज 01:36, 1 मई तक
विष्टि (भद्रा) 14:03, 1 मई तक
चंद्र राशि
धनु 05:36, 1 मई तक
सूर्य राशिमेष
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:41
सूर्यास्त
18:55
चंद्रोदय
इस दिन चंद्रोदय नहीं
चंद्रास्त
09:45
दिनमान
13h 14m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
चैत्र
मास (पूर्णिमांत)
वैशाख
विक्रम संवत
2100
शक संवत
1965, रुधिरोद्गारी संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:15 – 04:58
अभिजीत मुहूर्त
11:52 – 12:45

अशुभ समय

राहुकाल
13:57 – 15:37
यमगंड
05:41 – 07:20
गुलिक काल
09:00 – 10:39

30 अप्रैल 2043 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ05:41 – 07:20शुभ
रोग07:20 – 09:00टालें
उद्वेग09:00 – 10:39टालें
चर10:39 – 12:18सामान्य
लाभ12:18 – 13:57शुभ
अमृत13:57 – 15:37शुभ
काल15:37 – 17:16टालें
शुभ17:16 – 18:55शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत18:55 – 20:16शुभ
चर20:16 – 21:36सामान्य
रोग21:36 – 22:57टालें
काल22:57 – 00:18टालें
लाभ00:18 – 01:38शुभ
उद्वेग01:38 – 02:59टालें
शुभ02:59 – 04:20शुभ
अमृत04:20 – 05:40शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु05:4106:47दिन
मंगल06:4707:53दिन
सूर्य07:5309:00दिन
शुक्र09:0010:06दिन
बुध10:0611:12दिन
चंद्र11:1212:18दिन
शनि12:1813:24दिन
गुरु13:2414:30दिन
मंगल14:3015:37दिन
सूर्य15:3716:43दिन
शुक्र16:4317:49दिन
बुध17:4918:55दिन
चंद्र18:5519:49रात
शनि19:4920:43रात
गुरु20:4321:36रात
मंगल21:3622:30रात
सूर्य22:3023:24रात
शुक्र23:2400:18रात
बुध00:1801:11रात
चंद्र01:1102:05रात
शनि02:0502:59रात
गुरु02:5903:53रात
मंगल03:5304:47रात
सूर्य04:4705:40रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
2 मई 2043कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
5 मई 2043कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
7 मई 2043प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
9 मई 2043वैशाख अमावस्याअमावस्या
12 मई 2043विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
15 मई 2043वृषभ संक्रांतिसूर्य का वृषभ में प्रवेश
19 मई 2043शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
21 मई 2043प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
23 मई 2043वैशाख पूर्णिमापूर्णिमा
28 मई 2043संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.4623° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।