8 जनवरी 2045 को नई दिल्ली का पंचांग

रविवार, 8 जनवरी 2045, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 8 जनवरी 2045 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण षष्ठी (22:06 तक), नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी (04:35, 9 जन॰ तक) और योग सौभाग्य है। सूर्योदय 07:15 पर और सूर्यास्त 17:40 पर है। राहुकाल 16:22 से 17:40 तक है।

दिन और रात
दिन 07:15 – 17:40
रात 07:15 तक
तिथि
षष्ठी, 22:06 तक
सप्तमी
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी, 04:35 तक
हस्त
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

8 जनवरी 2045 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण षष्ठी 22:06 तक
कृष्ण सप्तमी 21:12, 9 जन॰ तक
नक्षत्र
हस्त 04:32, 10 जन॰ तक
योग
सौभाग्य 10:17 तक
शोभन 08:01, 9 जन॰ तक
करण
गर 10:49 तक
वणिज 22:06 तक
विष्टि (भद्रा) 09:33, 9 जन॰ तक
चंद्र राशि
सिंह 11:06 तक
सूर्य राशिधनु
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:15
सूर्यास्त
17:40
चंद्रोदय
23:14
चंद्रास्त
10:44
दिनमान
10h 26m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2101
शक संवत
1966, रक्ताक्षी संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:26 – 06:20
अभिजीत मुहूर्त
12:07 – 12:48

अशुभ समय

राहुकाल
16:22 – 17:40
यमगंड
12:27 – 13:46
गुलिक काल
15:04 – 16:22

8 जनवरी 2045 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग07:15 – 08:33टालें
चर08:33 – 09:51सामान्य
लाभ09:51 – 11:09शुभ
अमृत11:09 – 12:27शुभ
काल12:27 – 13:46टालें
शुभ13:46 – 15:04शुभ
रोग15:04 – 16:22टालें
उद्वेग16:22 – 17:40टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ17:40 – 19:22शुभ
अमृत19:22 – 21:04शुभ
चर21:04 – 22:46सामान्य
रोग22:46 – 00:27टालें
काल00:27 – 02:09टालें
लाभ02:09 – 03:51शुभ
उद्वेग03:51 – 05:33टालें
शुभ05:33 – 07:15शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य07:1508:07दिन
शुक्र08:0708:59दिन
बुध08:5909:51दिन
चंद्र09:5110:43दिन
शनि10:4311:35दिन
गुरु11:3512:27दिन
मंगल12:2713:20दिन
सूर्य13:2014:12दिन
शुक्र14:1215:04दिन
बुध15:0415:56दिन
चंद्र15:5616:48दिन
शनि16:4817:40दिन
गुरु17:4018:48रात
मंगल18:4819:56रात
सूर्य19:5621:04रात
शुक्र21:0422:12रात
बुध22:1223:20रात
चंद्र23:2000:27रात
शनि00:2701:35रात
गुरु01:3502:43रात
मंगल02:4303:51रात
सूर्य03:5104:59रात
शुक्र04:5906:07रात
बुध06:0707:15रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
10 जन॰ 2045कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
13 जन॰ 2045कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
14 जन॰ 2045मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
15 जन॰ 2045प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
18 जन॰ 2045माघ अमावस्याअमावस्या
22 जन॰ 2045विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
29 जन॰ 2045शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
31 जन॰ 2045प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
1 फ़र॰ 2045माघ पूर्णिमापूर्णिमा
5 फ़र॰ 2045संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.4860° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।