31 जनवरी 2045 को नई दिल्ली का पंचांग

मंगलवार, 31 जनवरी 2045, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 31 जनवरी 2045 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल त्रयोदशी (10:02 तक), नक्षत्र पुनर्वसु (02:01, 1 फ़र॰ तक) और योग विष्कंभ है। सूर्योदय 07:09 पर और सूर्यास्त 17:59 पर है। राहुकाल 15:17 से 16:38 तक है।

दिन और रात
दिन 07:09 – 17:59
रात 07:09 तक
तिथि
चतुर्दशी, 06:20 तक
नक्षत्र
पुनर्वसु, 02:01 तक
पुष्य
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

31 जनवरी 2045 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
शुक्ल त्रयोदशी 10:02 तक
शुक्ल चतुर्दशी 06:20, 1 फ़र॰ तक
पूर्णिमा 02:35, 2 फ़र॰ तक
नक्षत्र
पुनर्वसु 02:01, 1 फ़र॰ तक
पुष्य 23:01, 1 फ़र॰ तक
योग
विष्कंभअशुभ 14:21 तक
प्रीति 10:04, 1 फ़र॰ तक
करण
तैतिल 10:02 तक
गर 20:12 तक
वणिज 06:20, 1 फ़र॰ तक
विष्टि (भद्रा) 16:27, 1 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
मिथुन 20:46 तक
सूर्य राशिमकर
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:09
सूर्यास्त
17:59
चंद्रोदय
16:14
चंद्रास्त
05:47
दिनमान
10h 50m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2101
शक संवत
1966, रक्ताक्षी संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:24 – 06:16
अभिजीत मुहूर्त
12:13 – 12:56

अशुभ समय

राहुकाल
15:17 – 16:38
यमगंड
09:52 – 11:13
गुलिक काल
12:34 – 13:55

31 जनवरी 2045 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग07:09 – 08:30टालें
उद्वेग08:30 – 09:52टालें
चर09:52 – 11:13सामान्य
लाभ11:13 – 12:34शुभ
अमृत12:34 – 13:55शुभ
काल13:55 – 15:17टालें
शुभ15:17 – 16:38शुभ
रोग16:38 – 17:59टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल17:59 – 19:38टालें
लाभ19:38 – 21:17शुभ
उद्वेग21:17 – 22:55टालें
शुभ22:55 – 00:34शुभ
अमृत00:34 – 02:13शुभ
चर02:13 – 03:51सामान्य
रोग03:51 – 05:30टालें
काल05:30 – 07:09टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल07:0908:03दिन
सूर्य08:0308:58दिन
शुक्र08:5809:52दिन
बुध09:5210:46दिन
चंद्र10:4611:40दिन
शनि11:4012:34दिन
गुरु12:3413:28दिन
मंगल13:2814:23दिन
सूर्य14:2315:17दिन
शुक्र15:1716:11दिन
बुध16:1117:05दिन
चंद्र17:0517:59दिन
शनि17:5919:05रात
गुरु19:0520:11रात
मंगल20:1121:17रात
सूर्य21:1722:22रात
शुक्र22:2223:28रात
बुध23:2800:34रात
चंद्र00:3401:40रात
शनि01:4002:46रात
गुरु02:4603:51रात
मंगल03:5104:57रात
सूर्य04:5706:03रात
शुक्र06:0307:09रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
31 जन॰ 2045प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
1 फ़र॰ 2045माघ पूर्णिमापूर्णिमा
5 फ़र॰ 2045संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
9 फ़र॰ 2045कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
12 फ़र॰ 2045कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
13 फ़र॰ 2045कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
14 फ़र॰ 2045प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
16 फ़र॰ 2045फाल्गुन अमावस्याअमावस्या
21 फ़र॰ 2045विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
27 फ़र॰ 2045शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
1 मार्च 2045प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.4869° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।