1 दिसंबर 2045 को नई दिल्ली का पंचांग

शुक्रवार, 1 दिसंबर 2045, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 1 दिसंबर 2045 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण अष्टमी (02:18, 2 दिस॰ तक), नक्षत्र मघा (12:16 तक) और योग वैधृति है। सूर्योदय 06:56 पर और सूर्यास्त 17:23 पर है। राहुकाल 10:51 से 12:10 तक है।

दिन और रात
दिन 06:56 – 17:23
रात 06:57 तक
तिथि
अष्टमी, 02:18 तक
नवमी
नक्षत्र
मघा, 12:16 तक
पूर्वा फाल्गुनी
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

1 दिसंबर 2045 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण अष्टमी 02:18, 2 दिस॰ तक
कृष्ण नवमी 00:24, 3 दिस॰ तक
नक्षत्र
मघा 12:16 तक
पूर्वा फाल्गुनी 11:01, 2 दिस॰ तक
योग
वैधृतिअशुभ 14:58 तक
विष्कंभअशुभ 12:11, 2 दिस॰ तक
करण
बालव 15:16 तक
कौलव 02:18, 2 दिस॰ तक
तैतिल 13:20, 2 दिस॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:56
सूर्यास्त
17:23
चंद्रोदय
इस दिन चंद्रोदय नहीं
चंद्रास्त
12:28
दिनमान
10h 27m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2102
शक संवत
1967, क्रोधन संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:08 – 06:02
अभिजीत मुहूर्त
11:49 – 12:31

अशुभ समय

राहुकाल
10:51 – 12:10
यमगंड
14:46 – 16:05
गुलिक काल
08:14 – 09:33

1 दिसंबर 2045 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर06:56 – 08:14सामान्य
लाभ08:14 – 09:33शुभ
अमृत09:33 – 10:51शुभ
काल10:51 – 12:10टालें
शुभ12:10 – 13:28शुभ
रोग13:28 – 14:46टालें
उद्वेग14:46 – 16:05टालें
चर16:05 – 17:23सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग17:23 – 19:05टालें
काल19:05 – 20:47टालें
लाभ20:47 – 22:28शुभ
उद्वेग22:28 – 00:10टालें
शुभ00:10 – 01:52शुभ
अमृत01:52 – 03:33शुभ
चर03:33 – 05:15सामान्य
रोग05:15 – 06:57टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र06:5607:48दिन
बुध07:4808:40दिन
चंद्र08:4009:33दिन
शनि09:3310:25दिन
गुरु10:2511:17दिन
मंगल11:1712:10दिन
सूर्य12:1013:02दिन
शुक्र13:0213:54दिन
बुध13:5414:46दिन
चंद्र14:4615:39दिन
शनि15:3916:31दिन
गुरु16:3117:23दिन
मंगल17:2318:31रात
सूर्य18:3119:39रात
शुक्र19:3920:47रात
बुध20:4721:54रात
चंद्र21:5423:02रात
शनि23:0200:10रात
गुरु00:1001:18रात
मंगल01:1802:26रात
सूर्य02:2603:33रात
शुक्र03:3304:41रात
बुध04:4105:49रात
चंद्र05:4906:57रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
1 दिस॰ 2045कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
4 दिस॰ 2045कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
6 दिस॰ 2045प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
8 दिस॰ 2045मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
12 दिस॰ 2045विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 दिस॰ 2045धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
20 दिस॰ 2045शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
22 दिस॰ 2045प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
23 दिस॰ 2045मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
27 दिस॰ 2045संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.4985° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।