23 दिसंबर 2045 को नई दिल्ली का पंचांग

शनिवार, 23 दिसंबर 2045, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 23 दिसंबर 2045 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्दशी (08:28 तक), नक्षत्र मृगशिरा (03:55, 24 दिस॰ तक) और योग शुभ है। सूर्योदय 07:10 पर और सूर्यास्त 17:29 पर है। राहुकाल 09:45 से 11:02 तक है।

दिन और रात
दिन 07:10 – 17:29
रात 07:11 तक
तिथि
पूर्णिमा, 06:19 तक
नक्षत्र
मृगशिरा, 03:55 तक
आर्द्रा
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

23 दिसंबर 2045 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
शुक्ल चतुर्दशी 08:28 तक
पूर्णिमा 06:19, 24 दिस॰ तक
कृष्ण प्रतिपदा 03:48, 25 दिस॰ तक
नक्षत्र
मृगशिरा 03:55, 24 दिस॰ तक
आर्द्रा 02:08, 25 दिस॰ तक
योग
शुभ 15:20 तक
शुक्ल 12:16, 24 दिस॰ तक
करण
वणिज 08:28 तक
विष्टि (भद्रा) 19:27 तक
बव 06:19, 24 दिस॰ तक
बालव 17:06, 24 दिस॰ तक
चंद्र राशि
वृषभ 16:41 तक
सूर्य राशिधनु
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:10
सूर्यास्त
17:29
चंद्रोदय
16:42
चंद्रास्त
06:25
दिनमान
10h 19m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2102
शक संवत
1967, क्रोधन संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:21 – 06:15
अभिजीत मुहूर्त
11:59 – 12:40

अशुभ समय

राहुकाल
09:45 – 11:02
यमगंड
13:37 – 14:55
गुलिक काल
07:10 – 08:27

23 दिसंबर 2045 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल07:10 – 08:27टालें
शुभ08:27 – 09:45शुभ
रोग09:45 – 11:02टालें
उद्वेग11:02 – 12:20टालें
चर12:20 – 13:37सामान्य
लाभ13:37 – 14:55शुभ
अमृत14:55 – 16:12शुभ
काल16:12 – 17:29टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ17:29 – 19:12शुभ
उद्वेग19:12 – 20:55टालें
शुभ20:55 – 22:37शुभ
अमृत22:37 – 00:20शुभ
चर00:20 – 02:03सामान्य
रोग02:03 – 03:45टालें
काल03:45 – 05:28टालें
लाभ05:28 – 07:11शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि07:1008:02दिन
गुरु08:0208:53दिन
मंगल08:5309:45दिन
सूर्य09:4510:37दिन
शुक्र10:3711:28दिन
बुध11:2812:20दिन
चंद्र12:2013:11दिन
शनि13:1114:03दिन
गुरु14:0314:55दिन
मंगल14:5515:46दिन
सूर्य15:4616:38दिन
शुक्र16:3817:29दिन
बुध17:2918:38रात
चंद्र18:3819:46रात
शनि19:4620:55रात
गुरु20:5522:03रात
मंगल22:0323:12रात
सूर्य23:1200:20रात
शुक्र00:2001:28रात
बुध01:2802:37रात
चंद्र02:3703:45रात
शनि03:4504:54रात
गुरु04:5406:02रात
मंगल06:0207:11रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
23 दिस॰ 2045मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
27 दिस॰ 2045संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
31 दिस॰ 2045कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
3 जन॰ 2046कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
5 जन॰ 2046प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
7 जन॰ 2046पौष अमावस्याअमावस्या
11 जन॰ 2046विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
14 जन॰ 2046मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
18 जन॰ 2046शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
20 जन॰ 2046प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.4993° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।