21 नवंबर 2046 को नई दिल्ली का पंचांग

बुधवार, 21 नवंबर 2046, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 21 नवंबर 2046 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण अष्टमी (22:50 तक), नक्षत्र मघा (02:46, 22 नव॰ तक) और योग इंद्र है। सूर्योदय 06:48 पर और सूर्यास्त 17:25 पर है। राहुकाल 12:06 से 13:26 तक है।

दिन और रात
दिन 06:48 – 17:25
रात 06:49 तक
तिथि
अष्टमी, 22:50 तक
नवमी
नक्षत्र
मघा, 02:46 तक
पूर्वा फाल्गुनी
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

21 नवंबर 2046 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण अष्टमी 22:50 तक
कृष्ण नवमी 20:48, 22 नव॰ तक
नक्षत्र
मघा 02:46, 22 नव॰ तक
योग
इंद्र 23:47 तक
वैधृतिअशुभ 20:55, 22 नव॰ तक
करण
बालव 11:40 तक
कौलव 22:50 तक
तैतिल 09:53, 22 नव॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:48
सूर्यास्त
17:25
चंद्रोदय
इस दिन चंद्रोदय नहीं
चंद्रास्त
12:41
दिनमान
10h 37m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2103
शक संवत
1968, अक्षय संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:01 – 05:54
अभिजीत मुहूर्त
11:45 – 12:28 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:06 – 13:26
यमगंड
08:07 – 09:27
गुलिक काल
10:47 – 12:06

21 नवंबर 2046 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:48 – 08:07शुभ
अमृत08:07 – 09:27शुभ
काल09:27 – 10:47टालें
शुभ10:47 – 12:06शुभ
रोग12:06 – 13:26टालें
उद्वेग13:26 – 14:46टालें
चर14:46 – 16:05सामान्य
लाभ16:05 – 17:25शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग17:25 – 19:05टालें
शुभ19:05 – 20:46शुभ
अमृत20:46 – 22:26शुभ
चर22:26 – 00:07सामान्य
रोग00:07 – 01:47टालें
काल01:47 – 03:28टालें
लाभ03:28 – 05:08शुभ
उद्वेग05:08 – 06:49टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:4807:41दिन
चंद्र07:4108:34दिन
शनि08:3409:27दिन
गुरु09:2710:20दिन
मंगल10:2011:13दिन
सूर्य11:1312:06दिन
शुक्र12:0612:59दिन
बुध12:5913:52दिन
चंद्र13:5214:46दिन
शनि14:4615:39दिन
गुरु15:3916:32दिन
मंगल16:3217:25दिन
सूर्य17:2518:32रात
शुक्र18:3219:39रात
बुध19:3920:46रात
चंद्र20:4621:53रात
शनि21:5323:00रात
गुरु23:0000:07रात
मंगल00:0701:14रात
सूर्य01:1402:21रात
शुक्र02:2103:28रात
बुध03:2804:35रात
चंद्र04:3505:42रात
शनि05:4206:49रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
21 नव॰ 2046कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
24 नव॰ 2046कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
26 नव॰ 2046प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
27 नव॰ 2046मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
1 दिस॰ 2046विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
9 दिस॰ 2046शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
11 दिस॰ 2046प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
13 दिस॰ 2046मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
16 दिस॰ 2046धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
17 दिस॰ 2046संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.5121° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।