24 जनवरी 2047 को नई दिल्ली का पंचांग

गुरुवार, 24 जनवरी 2047, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 24 जनवरी 2047 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण त्रयोदशी (07:43 तक), नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा (03:58, 25 जन॰ तक) और योग हर्षण है। सूर्योदय 07:12 पर और सूर्यास्त 17:53 पर है। राहुकाल 13:53 से 15:13 तक है।

दिन और रात
दिन 07:12 – 17:53
रात 07:12 तक
तिथि
चतुर्दशी
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा, 03:58 तक
उत्तराषाढ़ा
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

24 जनवरी 2047 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 07:43 तक
कृष्ण चतुर्दशी 07:15, 25 जन॰ तक
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा 03:58, 25 जन॰ तक
उत्तराषाढ़ा 04:28, 26 जन॰ तक
योग
हर्षण 03:25, 25 जन॰ तक
वज्रअशुभ 02:07, 26 जन॰ तक
करण
वणिज 07:43 तक
विष्टि (भद्रा) 19:26 तक
शकुनि 07:15, 25 जन॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमकर
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:12
सूर्यास्त
17:53
चंद्रोदय
05:45
चंद्रास्त
16:15
दिनमान
10h 41m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2103
शक संवत
1968, अक्षय संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:26 – 06:19
अभिजीत मुहूर्त
12:11 – 12:54

अशुभ समय

राहुकाल
13:53 – 15:13
यमगंड
07:12 – 08:32
गुलिक काल
09:53 – 11:13

24 जनवरी 2047 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ07:12 – 08:32शुभ
रोग08:32 – 09:53टालें
उद्वेग09:53 – 11:13टालें
चर11:13 – 12:33सामान्य
लाभ12:33 – 13:53शुभ
अमृत13:53 – 15:13शुभ
काल15:13 – 16:33टालें
शुभ16:33 – 17:53शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत17:53 – 19:33शुभ
चर19:33 – 21:13सामान्य
रोग21:13 – 22:53टालें
काल22:53 – 00:33टालें
लाभ00:33 – 02:12शुभ
उद्वेग02:12 – 03:52टालें
शुभ03:52 – 05:32शुभ
अमृत05:32 – 07:12शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु07:1208:06दिन
मंगल08:0608:59दिन
सूर्य08:5909:53दिन
शुक्र09:5310:46दिन
बुध10:4611:39दिन
चंद्र11:3912:33दिन
शनि12:3313:26दिन
गुरु13:2614:19दिन
मंगल14:1915:13दिन
सूर्य15:1316:06दिन
शुक्र16:0617:00दिन
बुध17:0017:53दिन
चंद्र17:5319:00रात
शनि19:0020:06रात
गुरु20:0621:13रात
मंगल21:1322:19रात
सूर्य22:1923:26रात
शुक्र23:2600:33रात
बुध00:3301:39रात
चंद्र01:3902:46रात
शनि02:4603:52रात
गुरु03:5204:59रात
मंगल04:5906:05रात
सूर्य06:0507:12रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
24 जन॰ 2047प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
26 जन॰ 2047माघ अमावस्याअमावस्या
30 जन॰ 2047विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
6 फ़र॰ 2047शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
8 फ़र॰ 2047प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
10 फ़र॰ 2047माघ पूर्णिमापूर्णिमा
13 फ़र॰ 2047कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
14 फ़र॰ 2047संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
17 फ़र॰ 2047कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
20 फ़र॰ 2047कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
22 फ़र॰ 2047प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.5145° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।