11 मार्च 2047 को नई दिल्ली का पंचांग

सोमवार, 11 मार्च 2047, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 11 मार्च 2047 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्दशी (10:27 तक), नक्षत्र मघा (09:20 तक) और योग धृति है। सूर्योदय 06:35 पर और सूर्यास्त 18:27 पर है। राहुकाल 08:04 से 09:33 तक है।

दिन और रात
दिन 06:35 – 18:27
रात 06:34 तक
तिथि
चतुर्दशी, 10:27 तक
पूर्णिमा
नक्षत्र
मघा, 09:20 तक
पूर्वा फाल्गुनी
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

11 मार्च 2047 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल चतुर्दशी 10:27 तक
पूर्णिमा 07:07, 12 मार्च तक
नक्षत्र
मघा 09:20 तक
पूर्वा फाल्गुनी 06:46, 12 मार्च तक
योग
धृति 20:29 तक
शूलअशुभ 16:26, 12 मार्च तक
करण
वणिज 10:27 तक
विष्टि (भद्रा) 20:49 तक
बव 07:07, 12 मार्च तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकुंभ
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:35
सूर्यास्त
18:27
चंद्रोदय
17:50
चंद्रास्त
05:44
दिनमान
11h 51m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2103
शक संवत
1968, अक्षय संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:58 – 05:47
अभिजीत मुहूर्त
12:07 – 12:55

अशुभ समय

राहुकाल
08:04 – 09:33
यमगंड
11:02 – 12:31
गुलिक काल
14:00 – 15:29

11 मार्च 2047 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत06:35 – 08:04शुभ
काल08:04 – 09:33टालें
शुभ09:33 – 11:02शुभ
रोग11:02 – 12:31टालें
उद्वेग12:31 – 14:00टालें
चर14:00 – 15:29सामान्य
लाभ15:29 – 16:58शुभ
अमृत16:58 – 18:27शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर18:27 – 19:57सामान्य
रोग19:57 – 21:28टालें
काल21:28 – 22:59टालें
लाभ22:59 – 00:30शुभ
उद्वेग00:30 – 02:01टालें
शुभ02:01 – 03:32शुभ
अमृत03:32 – 05:03शुभ
चर05:03 – 06:34सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र06:3507:35दिन
शनि07:3508:34दिन
गुरु08:3409:33दिन
मंगल09:3310:32दिन
सूर्य10:3211:32दिन
शुक्र11:3212:31दिन
बुध12:3113:30दिन
चंद्र13:3014:29दिन
शनि14:2915:29दिन
गुरु15:2916:28दिन
मंगल16:2817:27दिन
सूर्य17:2718:27दिन
शुक्र18:2719:27रात
बुध19:2720:28रात
चंद्र20:2821:28रात
शनि21:2822:29रात
गुरु22:2923:30रात
मंगल23:3000:30रात
सूर्य00:3001:31रात
शुक्र01:3102:32रात
बुध02:3203:32रात
चंद्र03:3204:33रात
शनि04:3305:34रात
गुरु05:3406:34रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
12 मार्च 2047फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा
15 मार्च 2047संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
15 मार्च 2047मीन संक्रांतिसूर्य का मीन में प्रवेश
19 मार्च 2047कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
22 मार्च 2047कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
24 मार्च 2047प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
26 मार्च 2047चैत्र अमावस्याअमावस्या
30 मार्च 2047विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
6 अप्रैल 2047शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
8 अप्रैल 2047प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.5163° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।