26 जुलाई 2048 को नई दिल्ली का पंचांग

रविवार, 26 जुलाई 2048, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 26 जुलाई 2048 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण प्रतिपदा (12:07 तक), नक्षत्र श्रवण (15:16 तक) और योग आयुष्मान है। सूर्योदय 05:39 पर और सूर्यास्त 19:15 पर है। राहुकाल 17:33 से 19:15 तक है।

दिन और रात
दिन 05:39 – 19:15
रात 05:40 तक
तिथि
प्रतिपदा, 12:07 तक
द्वितीया
नक्षत्र
श्रवण, 15:16 तक
धनिष्ठा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

26 जुलाई 2048 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण प्रतिपदा 12:07 तक
कृष्ण द्वितीया 09:35, 27 जुल॰ तक
नक्षत्र
श्रवण 15:16 तक
धनिष्ठा 13:37, 27 जुल॰ तक
योग
आयुष्मान 02:23, 27 जुल॰ तक
सौभाग्य 23:34, 27 जुल॰ तक
करण
कौलव 12:07 तक
तैतिल 22:48 तक
गर 09:35, 27 जुल॰ तक
चंद्र राशि
मकर 02:23, 27 जुल॰ तक
सूर्य राशिकर्क
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:39
सूर्यास्त
19:15
चंद्रोदय
19:52
चंद्रास्त
06:28
दिनमान
13h 36m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आषाढ़
मास (पूर्णिमांत)
श्रावण
विक्रम संवत
2105
शक संवत
1970, विभव संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:16 – 04:58
अभिजीत मुहूर्त
12:00 – 12:54

अशुभ समय

राहुकाल
17:33 – 19:15
यमगंड
12:27 – 14:09
गुलिक काल
15:51 – 17:33

26 जुलाई 2048 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:39 – 07:21टालें
चर07:21 – 09:03सामान्य
लाभ09:03 – 10:45शुभ
अमृत10:45 – 12:27शुभ
काल12:27 – 14:09टालें
शुभ14:09 – 15:51शुभ
रोग15:51 – 17:33टालें
उद्वेग17:33 – 19:15टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ19:15 – 20:33शुभ
अमृत20:33 – 21:51शुभ
चर21:51 – 23:09सामान्य
रोग23:09 – 00:27टालें
काल00:27 – 01:45टालें
लाभ01:45 – 03:04शुभ
उद्वेग03:04 – 04:22टालें
शुभ04:22 – 05:40शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:3906:47दिन
शुक्र06:4707:55दिन
बुध07:5509:03दिन
चंद्र09:0310:11दिन
शनि10:1111:19दिन
गुरु11:1912:27दिन
मंगल12:2713:35दिन
सूर्य13:3514:43दिन
शुक्र14:4315:51दिन
बुध15:5116:59दिन
चंद्र16:5918:07दिन
शनि18:0719:15दिन
गुरु19:1520:07रात
मंगल20:0720:59रात
सूर्य20:5921:51रात
शुक्र21:5122:43रात
बुध22:4323:35रात
चंद्र23:3500:27रात
शनि00:2701:19रात
गुरु01:1902:11रात
मंगल02:1103:04रात
सूर्य03:0403:56रात
शुक्र03:5604:48रात
बुध04:4805:40रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
29 जुल॰ 2048संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
2 अग॰ 2048कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
5 अग॰ 2048कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
7 अग॰ 2048प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
9 अग॰ 2048श्रावण अमावस्याअमावस्या
13 अग॰ 2048विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 अग॰ 2048सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश
20 अग॰ 2048शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
21 अग॰ 2048प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
23 अग॰ 2048श्रावण पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.5355° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।