30 जुलाई 2048 को नई दिल्ली का पंचांग

गुरुवार, 30 जुलाई 2048, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 30 जुलाई 2048 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण पंचमी (05:49 तक), नक्षत्र उत्तरा भाद्रपद (12:36 तक) और योग सुकर्मा है। सूर्योदय 05:41 पर और सूर्यास्त 19:13 पर है। राहुकाल 14:08 से 15:50 तक है।

दिन और रात
दिन 05:41 – 19:13
रात 05:42 तक
तिथि
षष्ठी
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद, 12:36 तक
रेवती
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

30 जुलाई 2048 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण पंचमी 05:49 तक
कृष्ण षष्ठी 06:07, 31 जुल॰ तक
नक्षत्र
रेवती 13:49, 31 जुल॰ तक
योग
सुकर्मा 18:30 तक
धृति 18:05, 31 जुल॰ तक
करण
तैतिल 05:49 तक
गर 17:51 तक
वणिज 06:07, 31 जुल॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकर्क
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:41
सूर्यास्त
19:13
चंद्रोदय
22:14
चंद्रास्त
10:34
दिनमान
13h 31m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आषाढ़
मास (पूर्णिमांत)
श्रावण
विक्रम संवत
2105
शक संवत
1970, विभव संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:18 – 04:59
अभिजीत मुहूर्त
12:00 – 12:54

अशुभ समय

राहुकाल
14:08 – 15:50
यमगंड
05:41 – 07:23
गुलिक काल
09:04 – 10:46

30 जुलाई 2048 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ05:41 – 07:23शुभ
रोग07:23 – 09:04टालें
उद्वेग09:04 – 10:46टालें
चर10:46 – 12:27सामान्य
लाभ12:27 – 14:08शुभ
अमृत14:08 – 15:50शुभ
काल15:50 – 17:31टालें
शुभ17:31 – 19:13शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत19:13 – 20:31शुभ
चर20:31 – 21:50सामान्य
रोग21:50 – 23:09टालें
काल23:09 – 00:27टालें
लाभ00:27 – 01:46शुभ
उद्वेग01:46 – 03:05टालें
शुभ03:05 – 04:23शुभ
अमृत04:23 – 05:42शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु05:4106:49दिन
मंगल06:4907:57दिन
सूर्य07:5709:04दिन
शुक्र09:0410:12दिन
बुध10:1211:19दिन
चंद्र11:1912:27दिन
शनि12:2713:35दिन
गुरु13:3514:42दिन
मंगल14:4215:50दिन
सूर्य15:5016:57दिन
शुक्र16:5718:05दिन
बुध18:0519:13दिन
चंद्र19:1320:05रात
शनि20:0520:57रात
गुरु20:5721:50रात
मंगल21:5022:42रात
सूर्य22:4223:35रात
शुक्र23:3500:27रात
बुध00:2701:20रात
चंद्र01:2002:12रात
शनि02:1203:05रात
गुरु03:0503:57रात
मंगल03:5704:49रात
सूर्य04:4905:42रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
2 अग॰ 2048कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
5 अग॰ 2048कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
7 अग॰ 2048प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
9 अग॰ 2048श्रावण अमावस्याअमावस्या
13 अग॰ 2048विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 अग॰ 2048सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश
20 अग॰ 2048शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
21 अग॰ 2048प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
23 अग॰ 2048श्रावण पूर्णिमापूर्णिमा
27 अग॰ 2048संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.5357° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।