9 दिसंबर 2048 को नई दिल्ली का पंचांग

बुधवार, 9 दिसंबर 2048, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 9 दिसंबर 2048 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्थी (07:17 तक), नक्षत्र श्रवण (03:33, 10 दिस॰ तक) और योग ध्रुव है। सूर्योदय 07:02 पर और सूर्यास्त 17:24 पर है। राहुकाल 12:13 से 13:31 तक है।

दिन और रात
दिन 07:02 – 17:24
रात 07:03 तक
तिथि
पंचमी, 04:42 तक
षष्ठी
नक्षत्र
श्रवण, 03:33 तक
धनिष्ठा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

9 दिसंबर 2048 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल चतुर्थी 07:17 तक
शुक्ल पंचमी 04:42, 10 दिस॰ तक
शुक्ल षष्ठी 02:42, 11 दिस॰ तक
नक्षत्र
श्रवण 03:33, 10 दिस॰ तक
धनिष्ठा 02:13, 11 दिस॰ तक
योग
ध्रुव 16:11 तक
व्याघातअशुभ 13:03, 10 दिस॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 07:17 तक
बव 17:56 तक
बालव 04:42, 10 दिस॰ तक
कौलव 15:38, 10 दिस॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:02
सूर्यास्त
17:24
चंद्रोदय
10:15
चंद्रास्त
21:38
दिनमान
10h 22m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2105
शक संवत
1970, विभव संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:13 – 06:07
अभिजीत मुहूर्त
11:52 – 12:34 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:13 – 13:31
यमगंड
08:20 – 09:38
गुलिक काल
10:55 – 12:13

9 दिसंबर 2048 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ07:02 – 08:20शुभ
अमृत08:20 – 09:38शुभ
काल09:38 – 10:55टालें
शुभ10:55 – 12:13शुभ
रोग12:13 – 13:31टालें
उद्वेग13:31 – 14:49टालें
चर14:49 – 16:06सामान्य
लाभ16:06 – 17:24शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग17:24 – 19:06टालें
शुभ19:06 – 20:49शुभ
अमृत20:49 – 22:31शुभ
चर22:31 – 00:13सामान्य
रोग00:13 – 01:56टालें
काल01:56 – 03:38टालें
लाभ03:38 – 05:20शुभ
उद्वेग05:20 – 07:03टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध07:0207:54दिन
चंद्र07:5408:46दिन
शनि08:4609:38दिन
गुरु09:3810:29दिन
मंगल10:2911:21दिन
सूर्य11:2112:13दिन
शुक्र12:1313:05दिन
बुध13:0513:57दिन
चंद्र13:5714:49दिन
शनि14:4915:40दिन
गुरु15:4016:32दिन
मंगल16:3217:24दिन
सूर्य17:2418:32रात
शुक्र18:3219:41रात
बुध19:4120:49रात
चंद्र20:4921:57रात
शनि21:5723:05रात
गुरु23:0500:13रात
मंगल00:1301:22रात
सूर्य01:2202:30रात
शुक्र02:3003:38रात
बुध03:3804:46रात
चंद्र04:4605:54रात
शनि05:5407:03रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
9 दिस॰ 2048विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
15 दिस॰ 2048शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
16 दिस॰ 2048धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
17 दिस॰ 2048प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
20 दिस॰ 2048मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
24 दिस॰ 2048संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
28 दिस॰ 2048कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
31 दिस॰ 2048कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
2 जन॰ 2049प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
4 जन॰ 2049पौष अमावस्याअमावस्या
7 जन॰ 2049विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.5407° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।