21 मार्च 2050 को नई दिल्ली का पंचांग

सोमवार, 21 मार्च 2050, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 21 मार्च 2050 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण त्रयोदशी (13:16 तक), नक्षत्र शतभिषा (01:27, 22 मार्च तक) और योग साध्य है। सूर्योदय 06:24 पर और सूर्यास्त 18:32 पर है। राहुकाल 07:55 से 09:26 तक है।

दिन और रात
दिन 06:24 – 18:32
रात 06:22 तक
तिथि
त्रयोदशी, 13:16 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
शतभिषा, 01:27 तक
पूर्वा भाद्रपद
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

21 मार्च 2050 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 13:16 तक
कृष्ण चतुर्दशी 09:40, 22 मार्च तक
नक्षत्र
शतभिषा 01:27, 22 मार्च तक
पूर्वा भाद्रपद 22:41, 22 मार्च तक
योग
साध्य 20:14 तक
शुभ 16:08, 22 मार्च तक
करण
वणिज 13:16 तक
विष्टि (भद्रा) 23:28 तक
शकुनि 09:40, 22 मार्च तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमीन
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:24
सूर्यास्त
18:32
चंद्रोदय
04:47
चंद्रास्त
16:51
दिनमान
12h 9m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
चैत्र
विक्रम संवत
2106
शक संवत
1971, शुक्ल संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:49 – 05:36
अभिजीत मुहूर्त
12:04 – 12:52

अशुभ समय

राहुकाल
07:55 – 09:26
यमगंड
10:57 – 12:28
गुलिक काल
13:59 – 15:30

21 मार्च 2050 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत06:24 – 07:55शुभ
काल07:55 – 09:26टालें
शुभ09:26 – 10:57शुभ
रोग10:57 – 12:28टालें
उद्वेग12:28 – 13:59टालें
चर13:59 – 15:30सामान्य
लाभ15:30 – 17:01शुभ
अमृत17:01 – 18:32शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर18:32 – 20:01सामान्य
रोग20:01 – 21:30टालें
काल21:30 – 22:59टालें
लाभ22:59 – 00:27शुभ
उद्वेग00:27 – 01:56टालें
शुभ01:56 – 03:25शुभ
अमृत03:25 – 04:54शुभ
चर04:54 – 06:22सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र06:2407:24दिन
शनि07:2408:25दिन
गुरु08:2509:26दिन
मंगल09:2610:27दिन
सूर्य10:2711:27दिन
शुक्र11:2712:28दिन
बुध12:2813:29दिन
चंद्र13:2914:29दिन
शनि14:2915:30दिन
गुरु15:3016:31दिन
मंगल16:3117:32दिन
सूर्य17:3218:32दिन
शुक्र18:3219:32रात
बुध19:3220:31रात
चंद्र20:3121:30रात
शनि21:3022:29रात
गुरु22:2923:28रात
मंगल23:2800:27रात
सूर्य00:2701:27रात
शुक्र01:2702:26रात
बुध02:2603:25रात
चंद्र03:2504:24रात
शनि04:2405:23रात
गुरु05:2306:22रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
21 मार्च 2050प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
22 मार्च 2050चैत्र अमावस्याअमावस्या
26 मार्च 2050विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
2 अप्रैल 2050शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
5 अप्रैल 2050प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
7 अप्रैल 2050चैत्र पूर्णिमापूर्णिमा
11 अप्रैल 2050संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
14 अप्रैल 2050मेष संक्रांतिसूर्य का मेष में प्रवेश
15 अप्रैल 2050कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
17 अप्रैल 2050कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
19 अप्रैल 2050प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.5586° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।