21 मई 2050 को नई दिल्ली का पंचांग

शनिवार, 21 मई 2050, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 21 मई 2050 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल प्रतिपदा (01:33, 22 मई तक), नक्षत्र कृत्तिका (10:25 तक) और योग अतिगंड है। सूर्योदय 05:27 पर और सूर्यास्त 19:08 पर है। राहुकाल 08:52 से 10:35 तक है।

दिन और रात
दिन 05:27 – 19:08
रात 05:26 तक
तिथि
प्रतिपदा, 01:33 तक
द्वितीया
नक्षत्र
कृत्तिका, 10:25 तक
रोहिणी
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

21 मई 2050 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
शुक्ल प्रतिपदा 01:33, 22 मई तक
शुक्ल द्वितीया 01:19, 23 मई तक
नक्षत्र
रोहिणी 10:32, 22 मई तक
योग
अतिगंडअशुभ 17:26 तक
सुकर्मा 16:03, 22 मई तक
करण
किंस्तुघ्न 13:53 तक
बव 01:33, 22 मई तक
बालव 13:21, 22 मई तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिवृषभ
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:27
सूर्यास्त
19:08
चंद्रोदय
05:41
चंद्रास्त
19:42
दिनमान
13h 41m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
ज्येष्ठ
मास (पूर्णिमांत)
ज्येष्ठ
विक्रम संवत
2107
शक संवत
1972, प्रमोद संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:04 – 04:46
अभिजीत मुहूर्त
11:50 – 12:45

अशुभ समय

राहुकाल
08:52 – 10:35
यमगंड
14:00 – 15:43
गुलिक काल
05:27 – 07:10

21 मई 2050 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल05:27 – 07:10टालें
शुभ07:10 – 08:52शुभ
रोग08:52 – 10:35टालें
उद्वेग10:35 – 12:17टालें
चर12:17 – 14:00सामान्य
लाभ14:00 – 15:43शुभ
अमृत15:43 – 17:25शुभ
काल17:25 – 19:08टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ19:08 – 20:25शुभ
उद्वेग20:25 – 21:43टालें
शुभ21:43 – 23:00शुभ
अमृत23:00 – 00:17शुभ
चर00:17 – 01:35सामान्य
रोग01:35 – 02:52टालें
काल02:52 – 04:09टालें
लाभ04:09 – 05:26शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि05:2706:35दिन
गुरु06:3507:44दिन
मंगल07:4408:52दिन
सूर्य08:5210:01दिन
शुक्र10:0111:09दिन
बुध11:0912:17दिन
चंद्र12:1713:26दिन
शनि13:2614:34दिन
गुरु14:3415:43दिन
मंगल15:4316:51दिन
सूर्य16:5118:00दिन
शुक्र18:0019:08दिन
बुध19:0820:00रात
चंद्र20:0020:51रात
शनि20:5121:43रात
गुरु21:4322:34रात
मंगल22:3423:26रात
सूर्य23:2600:17रात
शुक्र00:1701:09रात
बुध01:0902:00रात
चंद्र02:0002:52रात
शनि02:5203:43रात
गुरु03:4304:35रात
मंगल04:3505:26रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
24 मई 2050विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
1 जून 2050शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
3 जून 2050प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
5 जून 2050ज्येष्ठ पूर्णिमापूर्णिमा
9 जून 2050संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
12 जून 2050कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
15 जून 2050कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
15 जून 2050मिथुन संक्रांतिसूर्य का मिथुन में प्रवेश
17 जून 2050प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
19 जून 2050आषाढ़ अमावस्याअमावस्या

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.5609° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।