17 दिसंबर 2053 को नई दिल्ली का पंचांग

बुधवार, 17 दिसंबर 2053, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 17 दिसंबर 2053 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल सप्तमी (01:53, 18 दिस॰ तक), नक्षत्र शतभिषा (14:30 तक) और योग वज्र है। सूर्योदय 07:07 पर और सूर्यास्त 17:27 पर है। राहुकाल 12:17 से 13:34 तक है।

दिन और रात
दिन 07:07 – 17:27
रात 07:08 तक
तिथि
सप्तमी, 01:53 तक
अष्टमी
नक्षत्र
शतभिषा, 14:30 तक
पूर्वा भाद्रपद
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

17 दिसंबर 2053 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल सप्तमी 01:53, 18 दिस॰ तक
शुक्ल अष्टमी 03:18, 19 दिस॰ तक
नक्षत्र
शतभिषा 14:30 तक
पूर्वा भाद्रपद 16:42, 18 दिस॰ तक
योग
वज्रअशुभ 12:10 तक
सिद्धि 12:25, 18 दिस॰ तक
करण
गर 12:55 तक
वणिज 01:53, 18 दिस॰ तक
विष्टि (भद्रा) 14:41, 18 दिस॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिधनु
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:07
सूर्यास्त
17:27
चंद्रोदय
11:49
चंद्रास्त
23:44
दिनमान
10h 20m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2110
शक संवत
1975, श्रीमुख संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:18 – 06:12
अभिजीत मुहूर्त
11:56 – 12:37 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:17 – 13:34
यमगंड
08:24 – 09:42
गुलिक काल
10:59 – 12:17

17 दिसंबर 2053 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ07:07 – 08:24शुभ
अमृत08:24 – 09:42शुभ
काल09:42 – 10:59टालें
शुभ10:59 – 12:17शुभ
रोग12:17 – 13:34टालें
उद्वेग13:34 – 14:52टालें
चर14:52 – 16:09सामान्य
लाभ16:09 – 17:27शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग17:27 – 19:09टालें
शुभ19:09 – 20:52शुभ
अमृत20:52 – 22:34शुभ
चर22:34 – 00:17सामान्य
रोग00:17 – 02:00टालें
काल02:00 – 03:42टालें
लाभ03:42 – 05:25शुभ
उद्वेग05:25 – 07:08टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध07:0707:59दिन
चंद्र07:5908:50दिन
शनि08:5009:42दिन
गुरु09:4210:34दिन
मंगल10:3411:25दिन
सूर्य11:2512:17दिन
शुक्र12:1713:08दिन
बुध13:0814:00दिन
चंद्र14:0014:52दिन
शनि14:5215:43दिन
गुरु15:4316:35दिन
मंगल16:3517:27दिन
सूर्य17:2718:35रात
शुक्र18:3519:43रात
बुध19:4320:52रात
चंद्र20:5222:00रात
शनि22:0023:09रात
गुरु23:0900:17रात
मंगल00:1701:25रात
सूर्य01:2502:34रात
शुक्र02:3403:42रात
बुध03:4204:51रात
चंद्र04:5105:59रात
शनि05:5907:08रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
21 दिस॰ 2053शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
23 दिस॰ 2053प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
25 दिस॰ 2053मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
28 दिस॰ 2053संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
1 जन॰ 2054कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
4 जन॰ 2054कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
6 जन॰ 2054प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
8 जन॰ 2054पौष अमावस्याअमावस्या
13 जन॰ 2054विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
14 जन॰ 2054मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.6109° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।