10 अप्रैल 2054 को नई दिल्ली का पंचांग

शुक्रवार, 10 अप्रैल 2054, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 10 अप्रैल 2054 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वितीया (09:49 तक), नक्षत्र भरणी (21:57 तक) और योग प्रीति है। सूर्योदय 06:01 पर और सूर्यास्त 18:44 पर है। राहुकाल 10:47 से 12:22 तक है।

दिन और रात
दिन 06:01 – 18:44
रात 06:00 तक
तिथि
द्वितीया, 09:49 तक
तृतीया
नक्षत्र
भरणी, 21:57 तक
कृत्तिका
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

10 अप्रैल 2054 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल द्वितीया 09:49 तक
शुक्ल तृतीया 09:02, 11 अप्रैल तक
नक्षत्र
भरणी 21:57 तक
कृत्तिका 21:40, 11 अप्रैल तक
योग
प्रीति 03:56, 11 अप्रैल तक
आयुष्मान 01:58, 12 अप्रैल तक
करण
कौलव 09:49 तक
तैतिल 21:28 तक
गर 09:02, 11 अप्रैल तक
चंद्र राशि
मेष 03:55, 11 अप्रैल तक
सूर्य राशिमीन
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:01
सूर्यास्त
18:44
चंद्रोदय
07:31
चंद्रास्त
20:51
दिनमान
12h 43m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
चैत्र
मास (पूर्णिमांत)
चैत्र
विक्रम संवत
2111
शक संवत
1976, भाव संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:30 – 05:16
अभिजीत मुहूर्त
11:57 – 12:48

अशुभ समय

राहुकाल
10:47 – 12:22
यमगंड
15:33 – 17:08
गुलिक काल
07:36 – 09:11

10 अप्रैल 2054 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर06:01 – 07:36सामान्य
लाभ07:36 – 09:11शुभ
अमृत09:11 – 10:47शुभ
काल10:47 – 12:22टालें
शुभ12:22 – 13:58शुभ
रोग13:58 – 15:33टालें
उद्वेग15:33 – 17:08टालें
चर17:08 – 18:44सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग18:44 – 20:08टालें
काल20:08 – 21:33टालें
लाभ21:33 – 22:57शुभ
उद्वेग22:57 – 00:22टालें
शुभ00:22 – 01:46शुभ
अमृत01:46 – 03:11शुभ
चर03:11 – 04:35सामान्य
रोग04:35 – 06:00टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र06:0107:04दिन
बुध07:0408:08दिन
चंद्र08:0809:11दिन
शनि09:1110:15दिन
गुरु10:1511:19दिन
मंगल11:1912:22दिन
सूर्य12:2213:26दिन
शुक्र13:2614:29दिन
बुध14:2915:33दिन
चंद्र15:3316:37दिन
शनि16:3717:40दिन
गुरु17:4018:44दिन
मंगल18:4419:40रात
सूर्य19:4020:36रात
शुक्र20:3621:33रात
बुध21:3322:29रात
चंद्र22:2923:25रात
शनि23:2500:22रात
गुरु00:2201:18रात
मंगल01:1802:14रात
सूर्य02:1403:11रात
शुक्र03:1104:07रात
बुध04:0705:03रात
चंद्र05:0306:00रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
12 अप्रैल 2054विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
14 अप्रैल 2054मेष संक्रांतिसूर्य का मेष में प्रवेश
18 अप्रैल 2054शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
20 अप्रैल 2054प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
22 अप्रैल 2054चैत्र पूर्णिमापूर्णिमा
26 अप्रैल 2054संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
30 अप्रैल 2054कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
3 मई 2054कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
5 मई 2054प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
7 मई 2054वैशाख अमावस्याअमावस्या

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.6152° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।