23 जुलाई 2054 को नई दिल्ली का पंचांग

गुरुवार, 23 जुलाई 2054, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 23 जुलाई 2054 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण तृतीया (06:39 तक), नक्षत्र शतभिषा (23:15 तक) और योग सौभाग्य है। सूर्योदय 05:37 पर और सूर्यास्त 19:17 पर है। राहुकाल 14:10 से 15:52 तक है।

दिन और रात
दिन 05:37 – 19:17
रात 05:38 तक
तिथि
चतुर्थी
नक्षत्र
शतभिषा, 23:15 तक
पूर्वा भाद्रपद
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

23 जुलाई 2054 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण तृतीया 06:39 तक
कृष्ण चतुर्थी 09:11, 24 जुल॰ तक
नक्षत्र
शतभिषा 23:15 तक
पूर्वा भाद्रपद 02:14, 25 जुल॰ तक
योग
सौभाग्य 17:18 तक
शोभन 18:19, 24 जुल॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 06:39 तक
बव 19:56 तक
बालव 09:11, 24 जुल॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकर्क
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:37
सूर्यास्त
19:17
चंद्रोदय
21:34
चंद्रास्त
08:32
दिनमान
13h 40m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आषाढ़
मास (पूर्णिमांत)
श्रावण
विक्रम संवत
2111
शक संवत
1976, भाव संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:15 – 04:56
अभिजीत मुहूर्त
12:00 – 12:54

अशुभ समय

राहुकाल
14:10 – 15:52
यमगंड
05:37 – 07:20
गुलिक काल
09:02 – 10:45

23 जुलाई 2054 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ05:37 – 07:20शुभ
रोग07:20 – 09:02टालें
उद्वेग09:02 – 10:45टालें
चर10:45 – 12:27सामान्य
लाभ12:27 – 14:10शुभ
अमृत14:10 – 15:52शुभ
काल15:52 – 17:35टालें
शुभ17:35 – 19:17शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत19:17 – 20:35शुभ
चर20:35 – 21:52सामान्य
रोग21:52 – 23:10टालें
काल23:10 – 00:27टालें
लाभ00:27 – 01:45शुभ
उद्वेग01:45 – 03:03टालें
शुभ03:03 – 04:20शुभ
अमृत04:20 – 05:38शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु05:3706:46दिन
मंगल06:4607:54दिन
सूर्य07:5409:02दिन
शुक्र09:0210:10दिन
बुध10:1011:19दिन
चंद्र11:1912:27दिन
शनि12:2713:35दिन
गुरु13:3514:44दिन
मंगल14:4415:52दिन
सूर्य15:5217:00दिन
शुक्र17:0018:09दिन
बुध18:0919:17दिन
चंद्र19:1720:09रात
शनि20:0921:00रात
गुरु21:0021:52रात
मंगल21:5222:44रात
सूर्य22:4423:36रात
शुक्र23:3600:27रात
बुध00:2701:19रात
चंद्र01:1902:11रात
शनि02:1103:03रात
गुरु03:0303:54रात
मंगल03:5404:46रात
सूर्य04:4605:38रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
24 जुल॰ 2054संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
28 जुल॰ 2054कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
31 जुल॰ 2054कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
2 अग॰ 2054प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
3 अग॰ 2054श्रावण अमावस्याअमावस्या
7 अग॰ 2054विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
13 अग॰ 2054शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
16 अग॰ 2054प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
17 अग॰ 2054सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश
18 अग॰ 2054श्रावण पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.6192° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।