20 नवंबर 2054 को नई दिल्ली का पंचांग

शुक्रवार, 20 नवंबर 2054, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 20 नवंबर 2054 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण पंचमी (08:29 तक), नक्षत्र पुनर्वसु (08:24 तक) और योग शुभ है। सूर्योदय 06:47 पर और सूर्यास्त 17:25 पर है। राहुकाल 10:46 से 12:06 तक है।

दिन और रात
दिन 06:47 – 17:25
रात 06:48 तक
तिथि
षष्ठी, 06:43 तक
नक्षत्र
पुष्य
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

20 नवंबर 2054 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण पंचमी 08:29 तक
कृष्ण षष्ठी 06:43, 21 नव॰ तक
कृष्ण सप्तमी 04:51, 22 नव॰ तक
नक्षत्र
पुष्य 07:19, 21 नव॰ तक
योग
शुभ 08:21 तक
शुक्ल 05:43, 21 नव॰ तक
ब्रह्म 03:01, 22 नव॰ तक
करण
तैतिल 08:29 तक
गर 19:37 तक
वणिज 06:43, 21 नव॰ तक
विष्टि (भद्रा) 17:47, 21 नव॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:47
सूर्यास्त
17:25
चंद्रोदय
22:14
चंद्रास्त
11:09
दिनमान
10h 38m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2111
शक संवत
1976, भाव संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:00 – 05:54
अभिजीत मुहूर्त
11:45 – 12:27

अशुभ समय

राहुकाल
10:46 – 12:06
यमगंड
14:46 – 16:05
गुलिक काल
08:07 – 09:27

20 नवंबर 2054 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर06:47 – 08:07सामान्य
लाभ08:07 – 09:27शुभ
अमृत09:27 – 10:46शुभ
काल10:46 – 12:06टालें
शुभ12:06 – 13:26शुभ
रोग13:26 – 14:46टालें
उद्वेग14:46 – 16:05टालें
चर16:05 – 17:25सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग17:25 – 19:05टालें
काल19:05 – 20:46टालें
लाभ20:46 – 22:26शुभ
उद्वेग22:26 – 00:06टालें
शुभ00:06 – 01:47शुभ
अमृत01:47 – 03:27शुभ
चर03:27 – 05:08सामान्य
रोग05:08 – 06:48टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र06:4707:40दिन
बुध07:4008:33दिन
चंद्र08:3309:27दिन
शनि09:2710:20दिन
गुरु10:2011:13दिन
मंगल11:1312:06दिन
सूर्य12:0612:59दिन
शुक्र12:5913:52दिन
बुध13:5214:46दिन
चंद्र14:4615:39दिन
शनि15:3916:32दिन
गुरु16:3217:25दिन
मंगल17:2518:32रात
सूर्य18:3219:39रात
शुक्र19:3920:46रात
बुध20:4621:53रात
चंद्र21:5323:00रात
शनि23:0000:06रात
गुरु00:0601:13रात
मंगल01:1302:20रात
सूर्य02:2003:27रात
शुक्र03:2704:34रात
बुध04:3405:41रात
चंद्र05:4106:48रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
22 नव॰ 2054कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
25 नव॰ 2054कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
27 नव॰ 2054प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
29 नव॰ 2054मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
3 दिस॰ 2054विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
10 दिस॰ 2054शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
12 दिस॰ 2054प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
14 दिस॰ 2054मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
16 दिस॰ 2054धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
18 दिस॰ 2054संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.6238° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।