28 जुलाई 2055 को नई दिल्ली का पंचांग

बुधवार, 28 जुलाई 2055, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 28 जुलाई 2055 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल पंचमी (01:41, 29 जुल॰ तक), नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी (23:49 तक) और योग परिघ है। सूर्योदय 05:40 पर और सूर्यास्त 19:14 पर है। राहुकाल 12:27 से 14:09 तक है।

दिन और रात
दिन 05:40 – 19:14
रात 05:40 तक
तिथि
पंचमी, 01:41 तक
षष्ठी
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी, 23:49 तक
हस्त
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

28 जुलाई 2055 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल पंचमी 01:41, 29 जुल॰ तक
शुक्ल षष्ठी 23:05, 29 जुल॰ तक
नक्षत्र
हस्त 22:00, 29 जुल॰ तक
योग
परिघअशुभ 11:50 तक
शिव 08:33, 29 जुल॰ तक
करण
बव 15:03 तक
बालव 01:41, 29 जुल॰ तक
कौलव 12:21, 29 जुल॰ तक
चंद्र राशि
सिंह 07:17 तक
सूर्य राशिकर्क
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:40
सूर्यास्त
19:14
चंद्रोदय
09:39
चंद्रास्त
22:20
दिनमान
13h 34m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
श्रावण
विक्रम संवत
2112
शक संवत
1977, युवा संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:17 – 04:58
अभिजीत मुहूर्त
12:00 – 12:54 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:27 – 14:09
यमगंड
07:22 – 09:03
गुलिक काल
10:45 – 12:27

28 जुलाई 2055 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:40 – 07:22शुभ
अमृत07:22 – 09:03शुभ
काल09:03 – 10:45टालें
शुभ10:45 – 12:27शुभ
रोग12:27 – 14:09टालें
उद्वेग14:09 – 15:51टालें
चर15:51 – 17:33सामान्य
लाभ17:33 – 19:14शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग19:14 – 20:33टालें
शुभ20:33 – 21:51शुभ
अमृत21:51 – 23:09शुभ
चर23:09 – 00:27सामान्य
रोग00:27 – 01:46टालें
काल01:46 – 03:04टालें
लाभ03:04 – 04:22शुभ
उद्वेग04:22 – 05:40टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:4006:48दिन
चंद्र06:4807:56दिन
शनि07:5609:03दिन
गुरु09:0310:11दिन
मंगल10:1111:19दिन
सूर्य11:1912:27दिन
शुक्र12:2713:35दिन
बुध13:3514:43दिन
चंद्र14:4315:51दिन
शनि15:5116:59दिन
गुरु16:5918:06दिन
मंगल18:0619:14दिन
सूर्य19:1420:07रात
शुक्र20:0720:59रात
बुध20:5921:51रात
चंद्र21:5122:43रात
शनि22:4323:35रात
गुरु23:3500:27रात
मंगल00:2701:20रात
सूर्य01:2002:12रात
शुक्र02:1203:04रात
बुध03:0403:56रात
चंद्र03:5604:48रात
शनि04:4805:40रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
3 अग॰ 2055शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
5 अग॰ 2055प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
7 अग॰ 2055श्रावण पूर्णिमापूर्णिमा
11 अग॰ 2055संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
16 अग॰ 2055कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
17 अग॰ 2055सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश
19 अग॰ 2055कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
20 अग॰ 2055प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
22 अग॰ 2055भाद्रपद अमावस्याअमावस्या
26 अग॰ 2055विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.6334° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।