1 नवंबर 2055 को नई दिल्ली का पंचांग

सोमवार, 1 नवंबर 2055, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 1 नवंबर 2055 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वादशी (10:33 तक), नक्षत्र उत्तरा भाद्रपद (03:53, 2 नव॰ तक) और योग व्याघात है। सूर्योदय 06:32 पर और सूर्यास्त 17:36 पर है। राहुकाल 07:55 से 09:18 तक है।

दिन और रात
दिन 06:32 – 17:36
रात 06:33 तक
तिथि
द्वादशी, 10:33 तक
त्रयोदशी
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद, 03:53 तक
रेवती
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

1 नवंबर 2055 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल द्वादशी 10:33 तक
शुक्ल त्रयोदशी 13:05, 2 नव॰ तक
नक्षत्र
रेवती 06:48, 3 नव॰ तक
योग
व्याघातअशुभ 12:37 तक
हर्षण 13:30, 2 नव॰ तक
करण
बालव 10:33 तक
कौलव 23:50 तक
तैतिल 13:05, 2 नव॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:32
सूर्यास्त
17:36
चंद्रोदय
16:09
चंद्रास्त
03:35
दिनमान
11h 3m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2112
शक संवत
1977, युवा संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:49 – 05:41
अभिजीत मुहूर्त
11:42 – 12:26

अशुभ समय

राहुकाल
07:55 – 09:18
यमगंड
10:41 – 12:04
गुलिक काल
13:27 – 14:50

1 नवंबर 2055 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत06:32 – 07:55शुभ
काल07:55 – 09:18टालें
शुभ09:18 – 10:41शुभ
रोग10:41 – 12:04टालें
उद्वेग12:04 – 13:27टालें
चर13:27 – 14:50सामान्य
लाभ14:50 – 16:13शुभ
अमृत16:13 – 17:36शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर17:36 – 19:13सामान्य
रोग19:13 – 20:50टालें
काल20:50 – 22:27टालें
लाभ22:27 – 00:04शुभ
उद्वेग00:04 – 01:42टालें
शुभ01:42 – 03:19शुभ
अमृत03:19 – 04:56शुभ
चर04:56 – 06:33सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र06:3207:28दिन
शनि07:2808:23दिन
गुरु08:2309:18दिन
मंगल09:1810:13दिन
सूर्य10:1311:09दिन
शुक्र11:0912:04दिन
बुध12:0412:59दिन
चंद्र12:5913:55दिन
शनि13:5514:50दिन
गुरु14:5015:45दिन
मंगल15:4516:40दिन
सूर्य16:4017:36दिन
शुक्र17:3618:40रात
बुध18:4019:45रात
चंद्र19:4520:50रात
शनि20:5021:55रात
गुरु21:5523:00रात
मंगल23:0000:04रात
सूर्य00:0401:09रात
शुक्र01:0902:14रात
बुध02:1403:19रात
चंद्र03:1904:24रात
शनि04:2405:28रात
गुरु05:2806:33रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
2 नव॰ 2055प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
4 नव॰ 2055कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
8 नव॰ 2055संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
12 नव॰ 2055कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
15 नव॰ 2055कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
17 नव॰ 2055प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
17 नव॰ 2055वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
18 नव॰ 2055मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
22 नव॰ 2055विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
29 नव॰ 2055शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.6371° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।