12 दिसंबर 2055 को नई दिल्ली का पंचांग

रविवार, 12 दिसंबर 2055, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 12 दिसंबर 2055 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण अष्टमी (07:38 तक), नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी (22:15 तक) और योग प्रीति है। सूर्योदय 07:04 पर और सूर्यास्त 17:25 पर है। राहुकाल 16:07 से 17:25 तक है।

दिन और रात
दिन 07:04 – 17:25
रात 07:04 तक
तिथि
नवमी, 05:28 तक
दशमी
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी, 22:15 तक
हस्त
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

12 दिसंबर 2055 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण अष्टमी 07:38 तक
कृष्ण नवमी 05:28, 13 दिस॰ तक
कृष्ण दशमी 02:59, 14 दिस॰ तक
नक्षत्र
हस्त 20:34, 13 दिस॰ तक
योग
प्रीति 07:32 तक
आयुष्मान 04:33, 13 दिस॰ तक
सौभाग्य 01:20, 14 दिस॰ तक
करण
कौलव 07:38 तक
तैतिल 18:35 तक
गर 05:28, 13 दिस॰ तक
वणिज 16:16, 13 दिस॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:04
सूर्यास्त
17:25
चंद्रोदय
00:20
चंद्रास्त
13:10
दिनमान
10h 21m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2112
शक संवत
1977, युवा संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:14 – 06:09
अभिजीत मुहूर्त
11:53 – 12:35

अशुभ समय

राहुकाल
16:07 – 17:25
यमगंड
12:14 – 13:32
गुलिक काल
14:49 – 16:07

12 दिसंबर 2055 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग07:04 – 08:21टालें
चर08:21 – 09:39सामान्य
लाभ09:39 – 10:56शुभ
अमृत10:56 – 12:14शुभ
काल12:14 – 13:32टालें
शुभ13:32 – 14:49शुभ
रोग14:49 – 16:07टालें
उद्वेग16:07 – 17:25टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ17:25 – 19:07शुभ
अमृत19:07 – 20:50शुभ
चर20:50 – 22:32सामान्य
रोग22:32 – 00:14टालें
काल00:14 – 01:57टालें
लाभ01:57 – 03:39शुभ
उद्वेग03:39 – 05:22टालें
शुभ05:22 – 07:04शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य07:0407:55दिन
शुक्र07:5508:47दिन
बुध08:4709:39दिन
चंद्र09:3910:31दिन
शनि10:3111:22दिन
गुरु11:2212:14दिन
मंगल12:1413:06दिन
सूर्य13:0613:58दिन
शुक्र13:5814:49दिन
बुध14:4915:41दिन
चंद्र15:4116:33दिन
शनि16:3317:25दिन
गुरु17:2518:33रात
मंगल18:3319:41रात
सूर्य19:4120:50रात
शुक्र20:5021:58रात
बुध21:5823:06रात
चंद्र23:0600:14रात
शनि00:1401:23रात
गुरु01:2302:31रात
मंगल02:3103:39रात
सूर्य03:3904:48रात
शुक्र04:4805:56रात
बुध05:5607:04रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
12 दिस॰ 2055कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
14 दिस॰ 2055कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
16 दिस॰ 2055प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
16 दिस॰ 2055धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
18 दिस॰ 2055पौष अमावस्याअमावस्या
22 दिस॰ 2055विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
29 दिस॰ 2055शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
31 दिस॰ 2055प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
2 जन॰ 2056पौष पूर्णिमापूर्णिमा
6 जन॰ 2056संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
10 जन॰ 2056कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.6386° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।