5 जनवरी 2057 को नई दिल्ली का पंचांग

शुक्रवार, 5 जनवरी 2057, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 5 जनवरी 2057 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि अमावस्या (15:19 तक), नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा (00:45, 6 जन॰ तक) और योग ध्रुव है। सूर्योदय 07:14 पर और सूर्यास्त 17:38 पर है। राहुकाल 11:08 से 12:26 तक है।

दिन और रात
दिन 07:14 – 17:38
रात 07:14 तक
तिथि
अमावस्या, 15:19 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा, 00:45 तक
उत्तराषाढ़ा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

5 जनवरी 2057 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
अमावस्या 15:19 तक
शुक्ल प्रतिपदा 12:28, 6 जन॰ तक
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा 00:45, 6 जन॰ तक
उत्तराषाढ़ा 22:47, 6 जन॰ तक
योग
ध्रुव 12:37 तक
व्याघातअशुभ 09:00, 6 जन॰ तक
करण
नाग 15:19 तक
किंस्तुघ्न 01:51, 6 जन॰ तक
बव 12:28, 6 जन॰ तक
चंद्र राशि
धनु 06:13, 6 जन॰ तक
सूर्य राशिधनु
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:14
सूर्यास्त
17:38
चंद्रोदय
06:59
चंद्रास्त
17:38
दिनमान
10h 24m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2113
शक संवत
1978, धाता संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:25 – 06:20
अभिजीत मुहूर्त
12:05 – 12:47

अशुभ समय

राहुकाल
11:08 – 12:26
यमगंड
15:02 – 16:20
गुलिक काल
08:32 – 09:50

5 जनवरी 2057 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर07:14 – 08:32सामान्य
लाभ08:32 – 09:50शुभ
अमृत09:50 – 11:08शुभ
काल11:08 – 12:26टालें
शुभ12:26 – 13:44शुभ
रोग13:44 – 15:02टालें
उद्वेग15:02 – 16:20टालें
चर16:20 – 17:38सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग17:38 – 19:20टालें
काल19:20 – 21:02टालें
लाभ21:02 – 22:44शुभ
उद्वेग22:44 – 00:26टालें
शुभ00:26 – 02:08शुभ
अमृत02:08 – 03:50शुभ
चर03:50 – 05:32सामान्य
रोग05:32 – 07:14टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र07:1408:06दिन
बुध08:0608:58दिन
चंद्र08:5809:50दिन
शनि09:5010:42दिन
गुरु10:4211:34दिन
मंगल11:3412:26दिन
सूर्य12:2613:18दिन
शुक्र13:1814:10दिन
बुध14:1015:02दिन
चंद्र15:0215:54दिन
शनि15:5416:46दिन
गुरु16:4617:38दिन
मंगल17:3818:46रात
सूर्य18:4619:54रात
शुक्र19:5421:02रात
बुध21:0222:10रात
चंद्र22:1023:18रात
शनि23:1800:26रात
गुरु00:2601:34रात
मंगल01:3402:42रात
सूर्य02:4203:50रात
शुक्र03:5004:58रात
बुध04:5806:06रात
चंद्र06:0607:14रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
5 जन॰ 2057पौष अमावस्याअमावस्या
8 जन॰ 2057विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
14 जन॰ 2057मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
16 जन॰ 2057शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
18 जन॰ 2057प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
20 जन॰ 2057पौष पूर्णिमापूर्णिमा
24 जन॰ 2057संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
28 जन॰ 2057कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
31 जन॰ 2057कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
2 फ़र॰ 2057प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
3 फ़र॰ 2057माघ अमावस्याअमावस्या

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.6535° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।