3 फ़रवरी 2057 को नई दिल्ली का पंचांग

शनिवार, 3 फ़रवरी 2057, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 3 फ़रवरी 2057 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि अमावस्या (03:40, 4 फ़र॰ तक), नक्षत्र उत्तराषाढ़ा (09:11 तक) और योग सिद्धि है। सूर्योदय 07:07 पर और सूर्यास्त 18:02 पर है। राहुकाल 09:51 से 11:13 तक है।

दिन और रात
दिन 07:07 – 18:02
रात 07:07 तक
तिथि
अमावस्या, 03:40 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
श्रवण
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

3 फ़रवरी 2057 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
अमावस्या 03:40, 4 फ़र॰ तक
शुक्ल प्रतिपदा 01:56, 5 फ़र॰ तक
नक्षत्र
श्रवण 07:48, 4 फ़र॰ तक
योग
सिद्धि 14:13 तक
व्यतीपातअशुभ 11:22, 4 फ़र॰ तक
करण
चतुष्पद 16:42 तक
नाग 03:40, 4 फ़र॰ तक
किंस्तुघ्न 14:45, 4 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमकर
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:07
सूर्यास्त
18:02
चंद्रोदय
06:39
चंद्रास्त
17:28
दिनमान
10h 54m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2113
शक संवत
1978, धाता संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:23 – 06:15
अभिजीत मुहूर्त
12:13 – 12:56

अशुभ समय

राहुकाल
09:51 – 11:13
यमगंड
13:56 – 15:18
गुलिक काल
07:07 – 08:29

3 फ़रवरी 2057 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल07:07 – 08:29टालें
शुभ08:29 – 09:51शुभ
रोग09:51 – 11:13टालें
उद्वेग11:13 – 12:35टालें
चर12:35 – 13:56सामान्य
लाभ13:56 – 15:18शुभ
अमृत15:18 – 16:40शुभ
काल16:40 – 18:02टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ18:02 – 19:40शुभ
उद्वेग19:40 – 21:18टालें
शुभ21:18 – 22:56शुभ
अमृत22:56 – 00:34शुभ
चर00:34 – 02:12सामान्य
रोग02:12 – 03:51टालें
काल03:51 – 05:29टालें
लाभ05:29 – 07:07शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि07:0708:02दिन
गुरु08:0208:56दिन
मंगल08:5609:51दिन
सूर्य09:5110:45दिन
शुक्र10:4511:40दिन
बुध11:4012:35दिन
चंद्र12:3513:29दिन
शनि13:2914:24दिन
गुरु14:2415:18दिन
मंगल15:1816:13दिन
सूर्य16:1317:07दिन
शुक्र17:0718:02दिन
बुध18:0219:07रात
चंद्र19:0720:13रात
शनि20:1321:18रात
गुरु21:1822:23रात
मंगल22:2323:29रात
सूर्य23:2900:34रात
शुक्र00:3401:40रात
बुध01:4002:45रात
चंद्र02:4503:51रात
शनि03:5104:56रात
गुरु04:5606:01रात
मंगल06:0107:07रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
3 फ़र॰ 2057माघ अमावस्याअमावस्या
7 फ़र॰ 2057विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
13 फ़र॰ 2057कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
15 फ़र॰ 2057शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
17 फ़र॰ 2057प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
19 फ़र॰ 2057माघ पूर्णिमापूर्णिमा
23 फ़र॰ 2057संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
26 फ़र॰ 2057कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
1 मार्च 2057कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
3 मार्च 2057प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.6547° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।