28 सितंबर 2057 को नई दिल्ली का पंचांग

शुक्रवार, 28 सितंबर 2057, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 28 सितंबर 2057 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि अमावस्या (21:30 तक), नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी (19:05 तक) और योग शुक्ल है। सूर्योदय 06:12 पर और सूर्यास्त 18:10 पर है। राहुकाल 10:41 से 12:11 तक है।

दिन और रात
दिन 06:12 – 18:10
रात 06:13 तक
तिथि
अमावस्या, 21:30 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी, 19:05 तक
हस्त
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

28 सितंबर 2057 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
अमावस्या 21:30 तक
शुक्ल प्रतिपदा 20:05, 29 सित॰ तक
नक्षत्र
हस्त 18:25, 29 सित॰ तक
योग
शुक्ल 16:59 तक
ब्रह्म 14:48, 29 सित॰ तक
करण
चतुष्पद 10:03 तक
नाग 21:30 तक
किंस्तुघ्न 08:50, 29 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:12
सूर्यास्त
18:10
चंद्रोदय
05:37
चंद्रास्त
18:19
दिनमान
11h 58m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2114
शक संवत
1979, ईश्वर संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:36 – 05:24
अभिजीत मुहूर्त
11:47 – 12:35

अशुभ समय

राहुकाल
10:41 – 12:11
यमगंड
15:10 – 16:40
गुलिक काल
07:42 – 09:12

28 सितंबर 2057 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर06:12 – 07:42सामान्य
लाभ07:42 – 09:12शुभ
अमृत09:12 – 10:41शुभ
काल10:41 – 12:11टालें
शुभ12:11 – 13:41शुभ
रोग13:41 – 15:10टालें
उद्वेग15:10 – 16:40टालें
चर16:40 – 18:10सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग18:10 – 19:40टालें
काल19:40 – 21:11टालें
लाभ21:11 – 22:41शुभ
उद्वेग22:41 – 00:11टालें
शुभ00:11 – 01:42शुभ
अमृत01:42 – 03:12शुभ
चर03:12 – 04:42सामान्य
रोग04:42 – 06:13टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र06:1207:12दिन
बुध07:1208:12दिन
चंद्र08:1209:12दिन
शनि09:1210:11दिन
गुरु10:1111:11दिन
मंगल11:1112:11दिन
सूर्य12:1113:11दिन
शुक्र13:1114:11दिन
बुध14:1115:10दिन
चंद्र15:1016:10दिन
शनि16:1017:10दिन
गुरु17:1018:10दिन
मंगल18:1019:10रात
सूर्य19:1020:10रात
शुक्र20:1021:11रात
बुध21:1122:11रात
चंद्र22:1123:11रात
शनि23:1100:11रात
गुरु00:1101:12रात
मंगल01:1202:12रात
सूर्य02:1203:12रात
शुक्र03:1204:12रात
बुध04:1205:12रात
चंद्र05:1206:13रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
28 सित॰ 2057आश्विन अमावस्याअमावस्या
2 अक्टू॰ 2057विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
8 अक्टू॰ 2057शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
10 अक्टू॰ 2057प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
12 अक्टू॰ 2057आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
16 अक्टू॰ 2057संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
17 अक्टू॰ 2057तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
21 अक्टू॰ 2057कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
24 अक्टू॰ 2057कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
26 अक्टू॰ 2057प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.6637° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।