14 अगस्त 2058 को नई दिल्ली का पंचांग

बुधवार, 14 अगस्त 2058, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 14 अगस्त 2058 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण एकादशी (02:47, 15 अग॰ तक), नक्षत्र मृगशिरा (20:43 तक) और योग हर्षण है। सूर्योदय 05:49 पर और सूर्यास्त 19:01 पर है। राहुकाल 12:25 से 14:04 तक है।

दिन और रात
दिन 05:49 – 19:01
रात 05:50 तक
तिथि
एकादशी, 02:47 तक
द्वादशी
नक्षत्र
मृगशिरा, 20:43 तक
आर्द्रा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

14 अगस्त 2058 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण एकादशी 02:47, 15 अग॰ तक
कृष्ण द्वादशी 05:13, 16 अग॰ तक
नक्षत्र
आर्द्रा 23:40, 15 अग॰ तक
योग
हर्षण 01:30, 15 अग॰ तक
वज्रअशुभ 02:27, 16 अग॰ तक
करण
बव 13:40 तक
बालव 02:47, 15 अग॰ तक
कौलव 15:59, 15 अग॰ तक
चंद्र राशि
वृषभ 07:21 तक
सूर्य राशिकर्क
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:49
सूर्यास्त
19:01
चंद्रोदय
01:18
चंद्रास्त
15:41
दिनमान
13h 11m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2115
शक संवत
1980, बहुधान्य संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:23 – 05:06
अभिजीत मुहूर्त
11:59 – 12:52 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:25 – 14:04
यमगंड
07:28 – 09:07
गुलिक काल
10:46 – 12:25

14 अगस्त 2058 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:49 – 07:28शुभ
अमृत07:28 – 09:07शुभ
काल09:07 – 10:46टालें
शुभ10:46 – 12:25शुभ
रोग12:25 – 14:04टालें
उद्वेग14:04 – 15:43टालें
चर15:43 – 17:22सामान्य
लाभ17:22 – 19:01शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग19:01 – 20:22टालें
शुभ20:22 – 21:43शुभ
अमृत21:43 – 23:04शुभ
चर23:04 – 00:25सामान्य
रोग00:25 – 01:47टालें
काल01:47 – 03:08टालें
लाभ03:08 – 04:29शुभ
उद्वेग04:29 – 05:50टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:4906:55दिन
चंद्र06:5508:01दिन
शनि08:0109:07दिन
गुरु09:0710:13दिन
मंगल10:1311:19दिन
सूर्य11:1912:25दिन
शुक्र12:2513:31दिन
बुध13:3114:37दिन
चंद्र14:3715:43दिन
शनि15:4316:49दिन
गुरु16:4917:55दिन
मंगल17:5519:01दिन
सूर्य19:0119:55रात
शुक्र19:5520:49रात
बुध20:4921:43रात
चंद्र21:4322:37रात
शनि22:3723:31रात
गुरु23:3100:25रात
मंगल00:2501:20रात
सूर्य01:2002:14रात
शुक्र02:1403:08रात
बुध03:0804:02रात
चंद्र04:0204:56रात
शनि04:5605:50रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
14 अग॰ 2058कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
16 अग॰ 2058प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
17 अग॰ 2058सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश
19 अग॰ 2058भाद्रपद अमावस्याअमावस्या
23 अग॰ 2058विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
30 अग॰ 2058शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
31 अग॰ 2058प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
2 सित॰ 2058भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
6 सित॰ 2058संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
10 सित॰ 2058कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.6760° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।