29 अक्टूबर 2058 को नई दिल्ली का पंचांग

मंगलवार, 29 अक्टूबर 2058, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 29 अक्टूबर 2058 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल त्रयोदशी (21:57 तक), नक्षत्र उत्तरा भाद्रपद (19:59 तक) और योग व्याघात है। सूर्योदय 06:30 पर और सूर्यास्त 17:38 पर है। राहुकाल 14:51 से 16:14 तक है।

दिन और रात
दिन 06:30 – 17:38
रात 06:31 तक
तिथि
त्रयोदशी, 21:57 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद, 19:59 तक
रेवती
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

29 अक्टूबर 2058 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
शुक्ल त्रयोदशी 21:57 तक
शुक्ल चतुर्दशी 19:58, 30 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
रेवती 18:42, 30 अक्टू॰ तक
योग
व्याघातअशुभ 11:58 तक
हर्षण 09:04, 30 अक्टू॰ तक
करण
कौलव 11:02 तक
तैतिल 21:57 तक
गर 08:55, 30 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:30
सूर्यास्त
17:38
चंद्रोदय
16:31
चंद्रास्त
03:56
दिनमान
11h 7m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2115
शक संवत
1980, बहुधान्य संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:48 – 05:39
अभिजीत मुहूर्त
11:42 – 12:26

अशुभ समय

राहुकाल
14:51 – 16:14
यमगंड
09:17 – 10:41
गुलिक काल
12:04 – 13:28

29 अक्टूबर 2058 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग06:30 – 07:54टालें
उद्वेग07:54 – 09:17टालें
चर09:17 – 10:41सामान्य
लाभ10:41 – 12:04शुभ
अमृत12:04 – 13:28शुभ
काल13:28 – 14:51टालें
शुभ14:51 – 16:14शुभ
रोग16:14 – 17:38टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल17:38 – 19:15टालें
लाभ19:15 – 20:51शुभ
उद्वेग20:51 – 22:28टालें
शुभ22:28 – 00:05शुभ
अमृत00:05 – 01:41शुभ
चर01:41 – 03:18सामान्य
रोग03:18 – 04:55टालें
काल04:55 – 06:31टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल06:3007:26दिन
सूर्य07:2608:22दिन
शुक्र08:2209:17दिन
बुध09:1710:13दिन
चंद्र10:1311:09दिन
शनि11:0912:04दिन
गुरु12:0413:00दिन
मंगल13:0013:55दिन
सूर्य13:5514:51दिन
शुक्र14:5115:47दिन
बुध15:4716:42दिन
चंद्र16:4217:38दिन
शनि17:3818:42रात
गुरु18:4219:47रात
मंगल19:4720:51रात
सूर्य20:5121:56रात
शुक्र21:5623:00रात
बुध23:0000:05रात
चंद्र00:0501:09रात
शनि01:0902:13रात
गुरु02:1303:18रात
मंगल03:1804:22रात
सूर्य04:2205:27रात
शुक्र05:2706:31रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
29 अक्टू॰ 2058प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
31 अक्टू॰ 2058आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
4 नव॰ 2058संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
8 नव॰ 2058कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
12 नव॰ 2058कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
14 नव॰ 2058प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
16 नव॰ 2058कार्तिक अमावस्याअमावस्या
17 नव॰ 2058वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
19 नव॰ 2058विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
26 नव॰ 2058शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.6789° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।