16 दिसंबर 2059 को नई दिल्ली का पंचांग

मंगलवार, 16 दिसंबर 2059, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 16 दिसंबर 2059 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वादशी (12:46 तक), नक्षत्र भरणी (17:56 तक) और योग शिव है। सूर्योदय 07:06 पर और सूर्यास्त 17:26 पर है। राहुकाल 14:51 से 16:09 तक है।

दिन और रात
दिन 07:06 – 17:26
रात 07:07 तक
तिथि
द्वादशी, 12:46 तक
त्रयोदशी
नक्षत्र
भरणी, 17:56 तक
कृत्तिका
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

16 दिसंबर 2059 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
शुक्ल द्वादशी 12:46 तक
शुक्ल त्रयोदशी 10:49, 17 दिस॰ तक
नक्षत्र
भरणी 17:56 तक
कृत्तिका 16:43, 17 दिस॰ तक
योग
शिव 18:11 तक
सिद्ध 15:25, 17 दिस॰ तक
करण
बालव 12:46 तक
कौलव 23:46 तक
तैतिल 10:49, 17 दिस॰ तक
चंद्र राशि
मेष 23:37 तक
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:06
सूर्यास्त
17:26
चंद्रोदय
15:09
चंद्रास्त
03:59
दिनमान
10h 20m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2116
शक संवत
1981, प्रमाथी संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:17 – 06:11
अभिजीत मुहूर्त
11:55 – 12:37

अशुभ समय

राहुकाल
14:51 – 16:09
यमगंड
09:41 – 10:59
गुलिक काल
12:16 – 13:34

16 दिसंबर 2059 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग07:06 – 08:24टालें
उद्वेग08:24 – 09:41टालें
चर09:41 – 10:59सामान्य
लाभ10:59 – 12:16शुभ
अमृत12:16 – 13:34शुभ
काल13:34 – 14:51टालें
शुभ14:51 – 16:09शुभ
रोग16:09 – 17:26टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल17:26 – 19:09टालें
लाभ19:09 – 20:51शुभ
उद्वेग20:51 – 22:34टालें
शुभ22:34 – 00:16शुभ
अमृत00:16 – 01:59शुभ
चर01:59 – 03:42सामान्य
रोग03:42 – 05:24टालें
काल05:24 – 07:07टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल07:0607:58दिन
सूर्य07:5808:49दिन
शुक्र08:4909:41दिन
बुध09:4110:33दिन
चंद्र10:3311:24दिन
शनि11:2412:16दिन
गुरु12:1613:08दिन
मंगल13:0813:59दिन
सूर्य13:5914:51दिन
शुक्र14:5115:43दिन
बुध15:4316:34दिन
चंद्र16:3417:26दिन
शनि17:2618:34रात
गुरु18:3419:43रात
मंगल19:4320:51रात
सूर्य20:5122:00रात
शुक्र22:0023:08रात
बुध23:0800:16रात
चंद्र00:1601:25रात
शनि01:2502:33रात
गुरु02:3303:42रात
मंगल03:4204:50रात
सूर्य04:5005:58रात
शुक्र05:5807:07रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
16 दिस॰ 2059धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
17 दिस॰ 2059प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
19 दिस॰ 2059मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
22 दिस॰ 2059संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
27 दिस॰ 2059कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
30 दिस॰ 2059कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
1 जन॰ 2060प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
3 जन॰ 2060पौष अमावस्याअमावस्या
7 जन॰ 2060विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
13 जन॰ 2060शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.6947° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।