18 नवंबर 2060 को नई दिल्ली का पंचांग

गुरुवार, 18 नवंबर 2060, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 18 नवंबर 2060 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण एकादशी (23:07 तक), नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी (14:09 तक) और योग विष्कंभ है। सूर्योदय 06:46 पर और सूर्यास्त 17:26 पर है। राहुकाल 13:26 से 14:46 तक है।

दिन और रात
दिन 06:46 – 17:26
रात 06:47 तक
तिथि
एकादशी, 23:07 तक
द्वादशी
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी, 14:09 तक
हस्त
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

18 नवंबर 2060 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण एकादशी 23:07 तक
कृष्ण द्वादशी 01:46, 20 नव॰ तक
नक्षत्र
हस्त 17:10, 19 नव॰ तक
योग
विष्कंभअशुभ 16:31 तक
प्रीति 17:25, 19 नव॰ तक
करण
बव 09:54 तक
बालव 23:07 तक
कौलव 12:25, 19 नव॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:46
सूर्यास्त
17:26
चंद्रोदय
02:24
चंद्रास्त
14:49
दिनमान
10h 40m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2117
शक संवत
1982, विक्रम संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:59 – 05:53
अभिजीत मुहूर्त
11:44 – 12:27

अशुभ समय

राहुकाल
13:26 – 14:46
यमगंड
06:46 – 08:06
गुलिक काल
09:26 – 10:46

18 नवंबर 2060 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ06:46 – 08:06शुभ
रोग08:06 – 09:26टालें
उद्वेग09:26 – 10:46टालें
चर10:46 – 12:06सामान्य
लाभ12:06 – 13:26शुभ
अमृत13:26 – 14:46शुभ
काल14:46 – 16:06टालें
शुभ16:06 – 17:26शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत17:26 – 19:06शुभ
चर19:06 – 20:46सामान्य
रोग20:46 – 22:26टालें
काल22:26 – 00:06टालें
लाभ00:06 – 01:46शुभ
उद्वेग01:46 – 03:26टालें
शुभ03:26 – 05:07शुभ
अमृत05:07 – 06:47शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु06:4607:39दिन
मंगल07:3908:33दिन
सूर्य08:3309:26दिन
शुक्र09:2610:19दिन
बुध10:1911:12दिन
चंद्र11:1212:06दिन
शनि12:0612:59दिन
गुरु12:5913:52दिन
मंगल13:5214:46दिन
सूर्य14:4615:39दिन
शुक्र15:3916:32दिन
बुध16:3217:26दिन
चंद्र17:2618:32रात
शनि18:3219:39रात
गुरु19:3920:46रात
मंगल20:4621:53रात
सूर्य21:5322:59रात
शुक्र22:5900:06रात
बुध00:0601:13रात
चंद्र01:1302:20रात
शनि02:2003:26रात
गुरु03:2604:33रात
मंगल04:3305:40रात
सूर्य05:4006:47रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
18 नव॰ 2060कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
20 नव॰ 2060प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
23 नव॰ 2060मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
27 नव॰ 2060विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
4 दिस॰ 2060शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
5 दिस॰ 2060प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
7 दिस॰ 2060मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
11 दिस॰ 2060संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
15 दिस॰ 2060कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
16 दिस॰ 2060धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.7076° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।