10 जुलाई 2062 को नई दिल्ली का पंचांग

सोमवार, 10 जुलाई 2062, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 10 जुलाई 2062 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्थी (09:35 तक), नक्षत्र मघा (12:39 तक) और योग सिद्धि है। सूर्योदय 05:30 पर और सूर्यास्त 19:22 पर है। राहुकाल 07:14 से 08:58 तक है।

दिन और रात
दिन 05:30 – 19:22
रात 05:31 तक
तिथि
चतुर्थी, 09:35 तक
पंचमी
नक्षत्र
मघा, 12:39 तक
पूर्वा फाल्गुनी
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

10 जुलाई 2062 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल चतुर्थी 09:35 तक
शुक्ल पंचमी 07:24, 11 जुल॰ तक
नक्षत्र
मघा 12:39 तक
पूर्वा फाल्गुनी 11:22, 11 जुल॰ तक
योग
सिद्धि 06:57 तक
व्यतीपातअशुभ 04:04, 11 जुल॰ तक
वरीयान 01:45, 12 जुल॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 09:35 तक
बव 20:24 तक
बालव 07:24, 11 जुल॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमिथुन
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:30
सूर्यास्त
19:22
चंद्रोदय
09:18
चंद्रास्त
22:22
दिनमान
13h 51m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आषाढ़
मास (पूर्णिमांत)
आषाढ़
विक्रम संवत
2119
शक संवत
1984, चित्रभानु संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:09 – 04:50
अभिजीत मुहूर्त
11:58 – 12:54

अशुभ समय

राहुकाल
07:14 – 08:58
यमगंड
10:42 – 12:26
गुलिक काल
14:10 – 15:54

10 जुलाई 2062 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:30 – 07:14शुभ
काल07:14 – 08:58टालें
शुभ08:58 – 10:42शुभ
रोग10:42 – 12:26टालें
उद्वेग12:26 – 14:10टालें
चर14:10 – 15:54सामान्य
लाभ15:54 – 17:38शुभ
अमृत17:38 – 19:22शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर19:22 – 20:38सामान्य
रोग20:38 – 21:54टालें
काल21:54 – 23:10टालें
लाभ23:10 – 00:26शुभ
उद्वेग00:26 – 01:42टालें
शुभ01:42 – 02:59शुभ
अमृत02:59 – 04:15शुभ
चर04:15 – 05:31सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:3006:40दिन
शनि06:4007:49दिन
गुरु07:4908:58दिन
मंगल08:5810:08दिन
सूर्य10:0811:17दिन
शुक्र11:1712:26दिन
बुध12:2613:35दिन
चंद्र13:3514:45दिन
शनि14:4515:54दिन
गुरु15:5417:03दिन
मंगल17:0318:12दिन
सूर्य18:1219:22दिन
शुक्र19:2220:12रात
बुध20:1221:03रात
चंद्र21:0321:54रात
शनि21:5422:45रात
गुरु22:4523:36रात
मंगल23:3600:26रात
सूर्य00:2601:17रात
शुक्र01:1702:08रात
बुध02:0802:59रात
चंद्र02:5903:49रात
शनि03:4904:40रात
गुरु04:4005:31रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
10 जुल॰ 2062विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 जुल॰ 2062शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
17 जुल॰ 2062कर्क संक्रांतिसूर्य का कर्क में प्रवेश
19 जुल॰ 2062प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
21 जुल॰ 2062आषाढ़ पूर्णिमापूर्णिमा
25 जुल॰ 2062संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
29 जुल॰ 2062कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
1 अग॰ 2062कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
3 अग॰ 2062प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
5 अग॰ 2062श्रावण अमावस्याअमावस्या
8 अग॰ 2062विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.7305° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।