28 फ़रवरी 2063 को नई दिल्ली का पंचांग

बुधवार, 28 फ़रवरी 2063, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 28 फ़रवरी 2063 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि अमावस्या (13:08 तक), नक्षत्र शतभिषा (23:09 तक) और योग शिव है। सूर्योदय 06:47 पर और सूर्यास्त 18:20 पर है। राहुकाल 12:33 से 14:00 तक है।

दिन और रात
दिन 06:47 – 18:20
रात 06:46 तक
तिथि
अमावस्या, 13:08 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
शतभिषा, 23:09 तक
पूर्वा भाद्रपद
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

28 फ़रवरी 2063 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
अमावस्या 13:08 तक
शुक्ल प्रतिपदा 15:19, 1 मार्च तक
नक्षत्र
शतभिषा 23:09 तक
पूर्वा भाद्रपद 01:42, 2 मार्च तक
योग
शिव 06:55 तक
सिद्ध 07:35, 1 मार्च तक
करण
नाग 13:08 तक
किंस्तुघ्न 02:16, 1 मार्च तक
बव 15:19, 1 मार्च तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकुंभ
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:47
सूर्यास्त
18:20
चंद्रोदय
06:45
चंद्रास्त
18:27
दिनमान
11h 33m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2119
शक संवत
1984, चित्रभानु संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:07 – 05:57
अभिजीत मुहूर्त
12:10 – 12:56 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:33 – 14:00
यमगंड
08:14 – 09:40
गुलिक काल
11:07 – 12:33

28 फ़रवरी 2063 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:47 – 08:14शुभ
अमृत08:14 – 09:40शुभ
काल09:40 – 11:07टालें
शुभ11:07 – 12:33शुभ
रोग12:33 – 14:00टालें
उद्वेग14:00 – 15:27टालें
चर15:27 – 16:53सामान्य
लाभ16:53 – 18:20शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग18:20 – 19:53टालें
शुभ19:53 – 21:26शुभ
अमृत21:26 – 23:00शुभ
चर23:00 – 00:33सामान्य
रोग00:33 – 02:06टालें
काल02:06 – 03:39टालें
लाभ03:39 – 05:13शुभ
उद्वेग05:13 – 06:46टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:4707:45दिन
चंद्र07:4508:42दिन
शनि08:4209:40दिन
गुरु09:4010:38दिन
मंगल10:3811:36दिन
सूर्य11:3612:33दिन
शुक्र12:3313:31दिन
बुध13:3114:29दिन
चंद्र14:2915:27दिन
शनि15:2716:24दिन
गुरु16:2417:22दिन
मंगल17:2218:20दिन
सूर्य18:2019:22रात
शुक्र19:2220:24रात
बुध20:2421:26रात
चंद्र21:2622:28रात
शनि22:2823:31रात
गुरु23:3100:33रात
मंगल00:3301:35रात
सूर्य01:3502:37रात
शुक्र02:3703:39रात
बुध03:3904:42रात
चंद्र04:4205:44रात
शनि05:4406:46रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
28 फ़र॰ 2063फाल्गुन अमावस्याअमावस्या
4 मार्च 2063विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
11 मार्च 2063शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
12 मार्च 2063प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
14 मार्च 2063फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा
15 मार्च 2063मीन संक्रांतिसूर्य का मीन में प्रवेश
18 मार्च 2063संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
22 मार्च 2063कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
25 मार्च 2063कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
27 मार्च 2063प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
29 मार्च 2063चैत्र अमावस्याअमावस्या

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.7394° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।