5 अक्टूबर 2063 को नई दिल्ली का पंचांग

शुक्रवार, 5 अक्टूबर 2063, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 5 अक्टूबर 2063 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल त्रयोदशी (14:37 तक), नक्षत्र शतभिषा (07:40 तक) और योग गंड है। सूर्योदय 06:16 पर और सूर्यास्त 18:02 पर है। राहुकाल 10:41 से 12:09 तक है।

दिन और रात
दिन 06:16 – 18:02
रात 06:16 तक
तिथि
त्रयोदशी, 14:37 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
पूर्वा भाद्रपद
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

5 अक्टूबर 2063 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल त्रयोदशी 14:37 तक
शुक्ल चतुर्दशी 16:57, 6 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
शतभिषा 07:40 तक
पूर्वा भाद्रपद 10:34, 6 अक्टू॰ तक
योग
गंडअशुभ 19:13 तक
वृद्धि 19:58, 6 अक्टू॰ तक
करण
तैतिल 14:37 तक
गर 03:50, 6 अक्टू॰ तक
वणिज 16:57, 6 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
कुंभ 03:52, 6 अक्टू॰ तक
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:16
सूर्यास्त
18:02
चंद्रोदय
16:49
चंद्रास्त
04:09
दिनमान
11h 47m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2120
शक संवत
1985, स्वभानु संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:38 – 05:27
अभिजीत मुहूर्त
11:45 – 12:32

अशुभ समय

राहुकाल
10:41 – 12:09
यमगंड
15:06 – 16:34
गुलिक काल
07:44 – 09:12

5 अक्टूबर 2063 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर06:16 – 07:44सामान्य
लाभ07:44 – 09:12शुभ
अमृत09:12 – 10:41शुभ
काल10:41 – 12:09टालें
शुभ12:09 – 13:37शुभ
रोग13:37 – 15:06टालें
उद्वेग15:06 – 16:34टालें
चर16:34 – 18:02सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग18:02 – 19:34टालें
काल19:34 – 21:06टालें
लाभ21:06 – 22:37शुभ
उद्वेग22:37 – 00:09टालें
शुभ00:09 – 01:41शुभ
अमृत01:41 – 03:13शुभ
चर03:13 – 04:44सामान्य
रोग04:44 – 06:16टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र06:1607:15दिन
बुध07:1508:13दिन
चंद्र08:1309:12दिन
शनि09:1210:11दिन
गुरु10:1111:10दिन
मंगल11:1012:09दिन
सूर्य12:0913:08दिन
शुक्र13:0814:07दिन
बुध14:0715:06दिन
चंद्र15:0616:04दिन
शनि16:0417:03दिन
गुरु17:0318:02दिन
मंगल18:0219:03रात
सूर्य19:0320:05रात
शुक्र20:0521:06रात
बुध21:0622:07रात
चंद्र22:0723:08रात
शनि23:0800:09रात
गुरु00:0901:10रात
मंगल01:1002:12रात
सूर्य02:1203:13रात
शुक्र03:1304:14रात
बुध04:1405:15रात
चंद्र05:1506:16रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
5 अक्टू॰ 2063प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
7 अक्टू॰ 2063आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
11 अक्टू॰ 2063संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
15 अक्टू॰ 2063कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
18 अक्टू॰ 2063कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
18 अक्टू॰ 2063तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
20 अक्टू॰ 2063प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
21 अक्टू॰ 2063कार्तिक अमावस्याअमावस्या
25 अक्टू॰ 2063विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
1 नव॰ 2063शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.7478° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।