23 अगस्त 2067 को नई दिल्ली का पंचांग

मंगलवार, 23 अगस्त 2067, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 23 अगस्त 2067 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल त्रयोदशी (06:08 तक), नक्षत्र श्रवण (01:16, 24 अग॰ तक) और योग सौभाग्य है। सूर्योदय 05:54 पर और सूर्यास्त 18:52 पर है। राहुकाल 15:38 से 17:15 तक है।

दिन और रात
दिन 05:54 – 18:52
रात 05:55 तक
तिथि
चतुर्दशी, 02:21 तक
पूर्णिमा
नक्षत्र
श्रवण, 01:16 तक
धनिष्ठा
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

23 अगस्त 2067 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
शुक्ल त्रयोदशी 06:08 तक
शुक्ल चतुर्दशी 02:21, 24 अग॰ तक
पूर्णिमा 22:27, 24 अग॰ तक
नक्षत्र
श्रवण 01:16, 24 अग॰ तक
धनिष्ठा 22:12, 24 अग॰ तक
योग
सौभाग्य 16:25 तक
शोभन 12:08, 24 अग॰ तक
करण
तैतिल 06:08 तक
गर 16:16 तक
वणिज 02:21, 24 अग॰ तक
विष्टि (भद्रा) 12:24, 24 अग॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिसिंह
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:54
सूर्यास्त
18:52
चंद्रोदय
17:41
चंद्रास्त
04:04
दिनमान
12h 58m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
श्रावण
विक्रम संवत
2124
शक संवत
1989, सर्वजित संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:26 – 05:10
अभिजीत मुहूर्त
11:57 – 12:49

अशुभ समय

राहुकाल
15:38 – 17:15
यमगंड
09:09 – 10:46
गुलिक काल
12:23 – 14:00

23 अगस्त 2067 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग05:54 – 07:31टालें
उद्वेग07:31 – 09:09टालें
चर09:09 – 10:46सामान्य
लाभ10:46 – 12:23शुभ
अमृत12:23 – 14:00शुभ
काल14:00 – 15:38टालें
शुभ15:38 – 17:15शुभ
रोग17:15 – 18:52टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल18:52 – 20:15टालें
लाभ20:15 – 21:38शुभ
उद्वेग21:38 – 23:01टालें
शुभ23:01 – 00:23शुभ
अमृत00:23 – 01:46शुभ
चर01:46 – 03:09सामान्य
रोग03:09 – 04:32टालें
काल04:32 – 05:55टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल05:5406:59दिन
सूर्य06:5908:04दिन
शुक्र08:0409:09दिन
बुध09:0910:14दिन
चंद्र10:1411:18दिन
शनि11:1812:23दिन
गुरु12:2313:28दिन
मंगल13:2814:33दिन
सूर्य14:3315:38दिन
शुक्र15:3816:43दिन
बुध16:4317:47दिन
चंद्र17:4718:52दिन
शनि18:5219:47रात
गुरु19:4720:43रात
मंगल20:4321:38रात
सूर्य21:3822:33रात
शुक्र22:3323:28रात
बुध23:2800:23रात
चंद्र00:2301:19रात
शनि01:1902:14रात
गुरु02:1403:09रात
मंगल03:0904:04रात
सूर्य04:0404:59रात
शुक्र04:5905:55रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
23 अग॰ 2067प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
24 अग॰ 2067श्रावण पूर्णिमापूर्णिमा
28 अग॰ 2067संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
1 सित॰ 2067कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
4 सित॰ 2067कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
6 सित॰ 2067प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
8 सित॰ 2067भाद्रपद अमावस्याअमावस्या
12 सित॰ 2067विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 सित॰ 2067कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
19 सित॰ 2067शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
21 सित॰ 2067प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.8020° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।