3 जनवरी 2068 को नई दिल्ली का पंचांग

मंगलवार, 3 जनवरी 2068, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 3 जनवरी 2068 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण त्रयोदशी (13:10 तक), नक्षत्र ज्येष्ठा (23:27 तक) और योग गंड है। सूर्योदय 07:14 पर और सूर्यास्त 17:36 पर है। राहुकाल 15:01 से 16:18 तक है।

दिन और रात
दिन 07:14 – 17:36
रात 07:14 तक
तिथि
त्रयोदशी, 13:10 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
ज्येष्ठा, 23:27 तक
मूल
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

3 जनवरी 2068 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 13:10 तक
कृष्ण चतुर्दशी 10:54, 4 जन॰ तक
नक्षत्र
मूल 21:38, 4 जन॰ तक
योग
गंडअशुभ 15:31 तक
वृद्धि 12:25, 4 जन॰ तक
करण
वणिज 13:10 तक
विष्टि (भद्रा) 00:06, 4 जन॰ तक
शकुनि 10:54, 4 जन॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिधनु
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:14
सूर्यास्त
17:36
चंद्रोदय
05:14
चंद्रास्त
15:55
दिनमान
10h 22m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2124
शक संवत
1989, सर्वजित संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:25 – 06:19
अभिजीत मुहूर्त
12:04 – 12:46

अशुभ समय

राहुकाल
15:01 – 16:18
यमगंड
09:49 – 11:07
गुलिक काल
12:25 – 13:43

3 जनवरी 2068 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग07:14 – 08:31टालें
उद्वेग08:31 – 09:49टालें
चर09:49 – 11:07सामान्य
लाभ11:07 – 12:25शुभ
अमृत12:25 – 13:43शुभ
काल13:43 – 15:01टालें
शुभ15:01 – 16:18शुभ
रोग16:18 – 17:36टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल17:36 – 19:18टालें
लाभ19:18 – 21:01शुभ
उद्वेग21:01 – 22:43टालें
शुभ22:43 – 00:25शुभ
अमृत00:25 – 02:07शुभ
चर02:07 – 03:49सामान्य
रोग03:49 – 05:32टालें
काल05:32 – 07:14टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल07:1408:06दिन
सूर्य08:0608:57दिन
शुक्र08:5709:49दिन
बुध09:4910:41दिन
चंद्र10:4111:33दिन
शनि11:3312:25दिन
गुरु12:2513:17दिन
मंगल13:1714:09दिन
सूर्य14:0915:01दिन
शुक्र15:0115:52दिन
बुध15:5216:44दिन
चंद्र16:4417:36दिन
शनि17:3618:44रात
गुरु18:4419:52रात
मंगल19:5221:01रात
सूर्य21:0122:09रात
शुक्र22:0923:17रात
बुध23:1700:25रात
चंद्र00:2501:33रात
शनि01:3302:41रात
गुरु02:4103:49रात
मंगल03:4904:58रात
सूर्य04:5806:06रात
शुक्र06:0607:14रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
3 जन॰ 2068प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
5 जन॰ 2068पौष अमावस्याअमावस्या
8 जन॰ 2068विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
15 जन॰ 2068शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
15 जन॰ 2068मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
17 जन॰ 2068प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
19 जन॰ 2068पौष पूर्णिमापूर्णिमा
23 जन॰ 2068संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
28 जन॰ 2068कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
30 जन॰ 2068कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
1 फ़र॰ 2068प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.8071° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।