22 जुलाई 2068 को नई दिल्ली का पंचांग

रविवार, 22 जुलाई 2068, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 22 जुलाई 2068 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण अष्टमी (10:01 तक), नक्षत्र अश्विनी (13:22 तक) और योग धृति है। सूर्योदय 05:37 पर और सूर्यास्त 19:17 पर है। राहुकाल 17:35 से 19:17 तक है।

दिन और रात
दिन 05:37 – 19:17
रात 05:38 तक
तिथि
अष्टमी, 10:01 तक
नवमी
नक्षत्र
अश्विनी, 13:22 तक
भरणी
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

22 जुलाई 2068 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण अष्टमी 10:01 तक
कृष्ण नवमी 08:40, 23 जुल॰ तक
नक्षत्र
भरणी 12:51, 23 जुल॰ तक
योग
धृति 09:46 तक
शूलअशुभ 07:38, 23 जुल॰ तक
करण
कौलव 10:01 तक
तैतिल 21:17 तक
गर 08:40, 23 जुल॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकर्क
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:37
सूर्यास्त
19:17
चंद्रोदय
इस दिन चंद्रोदय नहीं
चंद्रास्त
13:13
दिनमान
13h 40m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आषाढ़
मास (पूर्णिमांत)
श्रावण
विक्रम संवत
2125
शक संवत
1990, सर्वधारी संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:14 – 04:56
अभिजीत मुहूर्त
12:00 – 12:54

अशुभ समय

राहुकाल
17:35 – 19:17
यमगंड
12:27 – 14:10
गुलिक काल
15:52 – 17:35

22 जुलाई 2068 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:37 – 07:20टालें
चर07:20 – 09:02सामान्य
लाभ09:02 – 10:45शुभ
अमृत10:45 – 12:27शुभ
काल12:27 – 14:10टालें
शुभ14:10 – 15:52शुभ
रोग15:52 – 17:35टालें
उद्वेग17:35 – 19:17टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ19:17 – 20:35शुभ
अमृत20:35 – 21:52शुभ
चर21:52 – 23:10सामान्य
रोग23:10 – 00:27टालें
काल00:27 – 01:45टालें
लाभ01:45 – 03:02शुभ
उद्वेग03:02 – 04:20टालें
शुभ04:20 – 05:38शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:3706:45दिन
शुक्र06:4507:54दिन
बुध07:5409:02दिन
चंद्र09:0210:10दिन
शनि10:1011:19दिन
गुरु11:1912:27दिन
मंगल12:2713:35दिन
सूर्य13:3514:44दिन
शुक्र14:4415:52दिन
बुध15:5217:01दिन
चंद्र17:0118:09दिन
शनि18:0919:17दिन
गुरु19:1720:09रात
मंगल20:0921:01रात
सूर्य21:0121:52रात
शुक्र21:5222:44रात
बुध22:4423:36रात
चंद्र23:3600:27रात
शनि00:2701:19रात
गुरु01:1902:11रात
मंगल02:1103:02रात
सूर्य03:0203:54रात
शुक्र03:5404:46रात
बुध04:4605:38रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
22 जुल॰ 2068कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
25 जुल॰ 2068कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
27 जुल॰ 2068प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
29 जुल॰ 2068श्रावण अमावस्याअमावस्या
2 अग॰ 2068विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
9 अग॰ 2068शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
11 अग॰ 2068प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
13 अग॰ 2068श्रावण पूर्णिमापूर्णिमा
16 अग॰ 2068संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
17 अग॰ 2068सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश
20 अग॰ 2068कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.8148° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।