11 अगस्त 2068 को नई दिल्ली का पंचांग

शनिवार, 11 अगस्त 2068, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 11 अगस्त 2068 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल त्रयोदशी (21:43 तक), नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा (14:29 तक) और योग प्रीति है। सूर्योदय 05:48 पर और सूर्यास्त 19:03 पर है। राहुकाल 09:07 से 10:46 तक है।

दिन और रात
दिन 05:48 – 19:03
रात 05:49 तक
तिथि
त्रयोदशी, 21:43 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा, 14:29 तक
उत्तराषाढ़ा
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

11 अगस्त 2068 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
शुक्ल त्रयोदशी 21:43 तक
शुक्ल चतुर्दशी 18:45, 12 अग॰ तक
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा 12:29, 12 अग॰ तक
योग
प्रीति 22:43 तक
आयुष्मान 19:11, 12 अग॰ तक
करण
कौलव 11:00 तक
तैतिल 21:43 तक
गर 08:18, 12 अग॰ तक
चंद्र राशि
धनु 20:02 तक
सूर्य राशिकर्क
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:48
सूर्यास्त
19:03
चंद्रोदय
17:15
चंद्रास्त
03:19
दिनमान
13h 15m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
श्रावण
विक्रम संवत
2125
शक संवत
1990, सर्वधारी संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:22 – 05:05
अभिजीत मुहूर्त
11:59 – 12:52

अशुभ समय

राहुकाल
09:07 – 10:46
यमगंड
14:05 – 15:44
गुलिक काल
05:48 – 07:28

11 अगस्त 2068 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल05:48 – 07:28टालें
शुभ07:28 – 09:07शुभ
रोग09:07 – 10:46टालें
उद्वेग10:46 – 12:26टालें
चर12:26 – 14:05सामान्य
लाभ14:05 – 15:44शुभ
अमृत15:44 – 17:24शुभ
काल17:24 – 19:03टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ19:03 – 20:24शुभ
उद्वेग20:24 – 21:45टालें
शुभ21:45 – 23:05शुभ
अमृत23:05 – 00:26शुभ
चर00:26 – 01:47सामान्य
रोग01:47 – 03:07टालें
काल03:07 – 04:28टालें
लाभ04:28 – 05:49शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि05:4806:54दिन
गुरु06:5408:01दिन
मंगल08:0109:07दिन
सूर्य09:0710:13दिन
शुक्र10:1311:19दिन
बुध11:1912:26दिन
चंद्र12:2613:32दिन
शनि13:3214:38दिन
गुरु14:3815:44दिन
मंगल15:4416:51दिन
सूर्य16:5117:57दिन
शुक्र17:5719:03दिन
बुध19:0319:57रात
चंद्र19:5720:51रात
शनि20:5121:45रात
गुरु21:4522:38रात
मंगल22:3823:32रात
सूर्य23:3200:26रात
शुक्र00:2601:20रात
बुध01:2002:14रात
चंद्र02:1403:07रात
शनि03:0704:01रात
गुरु04:0104:55रात
मंगल04:5505:49रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
11 अग॰ 2068प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
13 अग॰ 2068श्रावण पूर्णिमापूर्णिमा
16 अग॰ 2068संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
17 अग॰ 2068सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश
20 अग॰ 2068कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
23 अग॰ 2068कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
25 अग॰ 2068प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
27 अग॰ 2068भाद्रपद अमावस्याअमावस्या
1 सित॰ 2068विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
8 सित॰ 2068शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.8156° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।