15 सितंबर 2077 को नई दिल्ली का पंचांग

बुधवार, 15 सितंबर 2077, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 15 सितंबर 2077 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण त्रयोदशी (06:55 तक), नक्षत्र मघा (01:42, 16 सित॰ तक) और योग सिद्ध है। सूर्योदय 06:06 पर और सूर्यास्त 18:25 पर है। राहुकाल 12:16 से 13:48 तक है।

दिन और रात
दिन 06:06 – 18:25
रात 06:06 तक
तिथि
चतुर्दशी
नक्षत्र
मघा, 01:42 तक
पूर्वा फाल्गुनी
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

15 सितंबर 2077 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 06:55 तक
कृष्ण चतुर्दशी 09:03, 16 सित॰ तक
नक्षत्र
मघा 01:42, 16 सित॰ तक
पूर्वा फाल्गुनी 04:31, 17 सित॰ तक
योग
सिद्ध 21:56 तक
साध्य 22:42, 16 सित॰ तक
करण
वणिज 06:55 तक
विष्टि (भद्रा) 19:57 तक
शकुनि 09:03, 16 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिसिंह
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:06
सूर्यास्त
18:25
चंद्रोदय
04:10
चंद्रास्त
17:45
दिनमान
12h 19m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2134
शक संवत
1999, हेमलंब संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:33 – 05:19
अभिजीत मुहूर्त
11:51 – 12:40 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:16 – 13:48
यमगंड
07:38 – 09:11
गुलिक काल
10:43 – 12:16

15 सितंबर 2077 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:06 – 07:38शुभ
अमृत07:38 – 09:11शुभ
काल09:11 – 10:43टालें
शुभ10:43 – 12:16शुभ
रोग12:16 – 13:48टालें
उद्वेग13:48 – 15:20टालें
चर15:20 – 16:53सामान्य
लाभ16:53 – 18:25शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग18:25 – 19:53टालें
शुभ19:53 – 21:20शुभ
अमृत21:20 – 22:48शुभ
चर22:48 – 00:16सामान्य
रोग00:16 – 01:43टालें
काल01:43 – 03:11टालें
लाभ03:11 – 04:39शुभ
उद्वेग04:39 – 06:06टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:0607:07दिन
चंद्र07:0708:09दिन
शनि08:0909:11दिन
गुरु09:1110:12दिन
मंगल10:1211:14दिन
सूर्य11:1412:16दिन
शुक्र12:1613:17दिन
बुध13:1714:19दिन
चंद्र14:1915:20दिन
शनि15:2016:22दिन
गुरु16:2217:24दिन
मंगल17:2418:25दिन
सूर्य18:2519:24रात
शुक्र19:2420:22रात
बुध20:2221:20रात
चंद्र21:2022:19रात
शनि22:1923:17रात
गुरु23:1700:16रात
मंगल00:1601:14रात
सूर्य01:1402:13रात
शुक्र02:1303:11रात
बुध03:1104:09रात
चंद्र04:0905:08रात
शनि05:0806:06रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
17 सित॰ 2077आश्विन अमावस्याअमावस्या
17 सित॰ 2077कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
21 सित॰ 2077विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
28 सित॰ 2077शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
30 सित॰ 2077प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
2 अक्टू॰ 2077अधिक आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
5 अक्टू॰ 2077संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
9 अक्टू॰ 2077कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
12 अक्टू॰ 2077कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
14 अक्टू॰ 2077प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.9427° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।