5 सितंबर 2093 को नई दिल्ली का पंचांग

शनिवार, 5 सितंबर 2093, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 5 सितंबर 2093 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि पूर्णिमा (13:59 तक), नक्षत्र शतभिषा (16:35 तक) और योग सुकर्मा है। सूर्योदय 06:01 पर और सूर्यास्त 18:37 पर है। राहुकाल 09:10 से 10:45 तक है।

दिन और रात
दिन 06:01 – 18:37
रात 06:02 तक
तिथि
पूर्णिमा, 13:59 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
शतभिषा, 16:35 तक
पूर्वा भाद्रपद
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

5 सितंबर 2093 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
पूर्णिमा 13:59 तक
कृष्ण प्रतिपदा 11:12, 6 सित॰ तक
नक्षत्र
शतभिषा 16:35 तक
पूर्वा भाद्रपद 14:39, 6 सित॰ तक
योग
सुकर्मा 08:38 तक
धृति 05:11, 6 सित॰ तक
शूलअशुभ 02:04, 7 सित॰ तक
करण
बव 13:59 तक
बालव 00:33, 6 सित॰ तक
कौलव 11:12, 6 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिसिंह
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:01
सूर्यास्त
18:37
चंद्रोदय
18:57
चंद्रास्त
05:40
दिनमान
12h 36m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2150
शक संवत
2015, प्रमादी संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:30 – 05:16
अभिजीत मुहूर्त
11:54 – 12:44

अशुभ समय

राहुकाल
09:10 – 10:45
यमगंड
13:54 – 15:28
गुलिक काल
06:01 – 07:36

5 सितंबर 2093 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल06:01 – 07:36टालें
शुभ07:36 – 09:10शुभ
रोग09:10 – 10:45टालें
उद्वेग10:45 – 12:19टालें
चर12:19 – 13:54सामान्य
लाभ13:54 – 15:28शुभ
अमृत15:28 – 17:02शुभ
काल17:02 – 18:37टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ18:37 – 20:03शुभ
उद्वेग20:03 – 21:28टालें
शुभ21:28 – 22:54शुभ
अमृत22:54 – 00:19शुभ
चर00:19 – 01:45सामान्य
रोग01:45 – 03:10टालें
काल03:10 – 04:36टालें
लाभ04:36 – 06:02शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि06:0107:04दिन
गुरु07:0408:07दिन
मंगल08:0709:10दिन
सूर्य09:1010:13दिन
शुक्र10:1311:16दिन
बुध11:1612:19दिन
चंद्र12:1913:22दिन
शनि13:2214:25दिन
गुरु14:2515:28दिन
मंगल15:2816:31दिन
सूर्य16:3117:34दिन
शुक्र17:3418:37दिन
बुध18:3719:34रात
चंद्र19:3420:31रात
शनि20:3121:28रात
गुरु21:2822:25रात
मंगल22:2523:22रात
सूर्य23:2200:19रात
शुक्र00:1901:16रात
बुध01:1602:13रात
चंद्र02:1303:10रात
शनि03:1004:07रात
गुरु04:0705:05रात
मंगल05:0506:02रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
5 सित॰ 2093भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
9 सित॰ 2093संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
13 सित॰ 2093कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
16 सित॰ 2093कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
17 सित॰ 2093कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
18 सित॰ 2093प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
20 सित॰ 2093आश्विन अमावस्याअमावस्या
24 सित॰ 2093विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
1 अक्टू॰ 2093शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
2 अक्टू॰ 2093प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
4 अक्टू॰ 2093आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 25.1659° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।