12 सितंबर 2098 को नई दिल्ली का पंचांग

शुक्रवार, 12 सितंबर 2098, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 12 सितंबर 2098 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण द्वितीया (02:37, 13 सित॰ तक), नक्षत्र उत्तरा भाद्रपद (21:11 तक) और योग गंड है। सूर्योदय 06:04 पर और सूर्यास्त 18:29 पर है। राहुकाल 10:44 से 12:17 तक है।

दिन और रात
दिन 06:04 – 18:29
रात 06:05 तक
तिथि
द्वितीया, 02:37 तक
तृतीया
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद, 21:11 तक
रेवती
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

12 सितंबर 2098 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण द्वितीया 02:37, 13 सित॰ तक
कृष्ण तृतीया 03:51, 14 सित॰ तक
नक्षत्र
रेवती 23:06, 13 सित॰ तक
योग
गंडअशुभ 23:48 तक
वृद्धि 23:47, 13 सित॰ तक
करण
तैतिल 13:52 तक
गर 02:37, 13 सित॰ तक
वणिज 15:17, 13 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिसिंह
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:04
सूर्यास्त
18:29
चंद्रोदय
19:25
चंद्रास्त
07:15
दिनमान
12h 25m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2155
शक संवत
2020, कालयुक्त संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:32 – 05:18
अभिजीत मुहूर्त
11:52 – 12:41

अशुभ समय

राहुकाल
10:44 – 12:17
यमगंड
15:23 – 16:56
गुलिक काल
07:37 – 09:11

12 सितंबर 2098 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर06:04 – 07:37सामान्य
लाभ07:37 – 09:11शुभ
अमृत09:11 – 10:44शुभ
काल10:44 – 12:17टालें
शुभ12:17 – 13:50शुभ
रोग13:50 – 15:23टालें
उद्वेग15:23 – 16:56टालें
चर16:56 – 18:29सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग18:29 – 19:56टालें
काल19:56 – 21:23टालें
लाभ21:23 – 22:50शुभ
उद्वेग22:50 – 00:17टालें
शुभ00:17 – 01:44शुभ
अमृत01:44 – 03:11शुभ
चर03:11 – 04:38सामान्य
रोग04:38 – 06:05टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र06:0407:06दिन
बुध07:0608:08दिन
चंद्र08:0809:11दिन
शनि09:1110:13दिन
गुरु10:1311:15दिन
मंगल11:1512:17दिन
सूर्य12:1713:19दिन
शुक्र13:1914:21दिन
बुध14:2115:23दिन
चंद्र15:2316:25दिन
शनि16:2517:27दिन
गुरु17:2718:29दिन
मंगल18:2919:27रात
सूर्य19:2720:25रात
शुक्र20:2521:23रात
बुध21:2322:21रात
चंद्र22:2123:19रात
शनि23:1900:17रात
गुरु00:1701:15रात
मंगल01:1502:13रात
सूर्य02:1303:11रात
शुक्र03:1104:09रात
बुध04:0905:07रात
चंद्र05:0706:05रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
14 सित॰ 2098संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
17 सित॰ 2098कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
18 सित॰ 2098कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
21 सित॰ 2098कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
23 सित॰ 2098प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
24 सित॰ 2098आश्विन अमावस्याअमावस्या
28 सित॰ 2098विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
5 अक्टू॰ 2098शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
8 अक्टू॰ 2098प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
10 अक्टू॰ 2098आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 25.2360° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।