16 सितंबर 2098 को नई दिल्ली का पंचांग

मंगलवार, 16 सितंबर 2098, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 16 सितंबर 2098 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण षष्ठी (04:36, 17 सित॰ तक), नक्षत्र कृत्तिका (02:01, 17 सित॰ तक) और योग हर्षण है। सूर्योदय 06:06 पर और सूर्यास्त 18:24 पर है। राहुकाल 15:20 से 16:52 तक है।

दिन और रात
दिन 06:06 – 18:24
रात 06:07 तक
तिथि
षष्ठी, 04:36 तक
सप्तमी
नक्षत्र
कृत्तिका, 02:01 तक
रोहिणी
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

16 सितंबर 2098 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
कृष्ण षष्ठी 04:36, 17 सित॰ तक
कृष्ण सप्तमी 03:43, 18 सित॰ तक
नक्षत्र
कृत्तिका 02:01, 17 सित॰ तक
रोहिणी 01:54, 18 सित॰ तक
योग
हर्षण 21:32 तक
वज्रअशुभ 19:55, 17 सित॰ तक
करण
गर 16:49 तक
वणिज 04:36, 17 सित॰ तक
विष्टि (भद्रा) 16:14, 17 सित॰ तक
चंद्र राशि
मेष 07:44 तक
सूर्य राशिसिंह
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:06
सूर्यास्त
18:24
चंद्रोदय
21:39
चंद्रास्त
11:06
दिनमान
12h 18m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2155
शक संवत
2020, कालयुक्त संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:33 – 05:20
अभिजीत मुहूर्त
11:51 – 12:40

अशुभ समय

राहुकाल
15:20 – 16:52
यमगंड
09:11 – 10:43
गुलिक काल
12:15 – 13:47

16 सितंबर 2098 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग06:06 – 07:39टालें
उद्वेग07:39 – 09:11टालें
चर09:11 – 10:43सामान्य
लाभ10:43 – 12:15शुभ
अमृत12:15 – 13:47शुभ
काल13:47 – 15:20टालें
शुभ15:20 – 16:52शुभ
रोग16:52 – 18:24टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल18:24 – 19:52टालें
लाभ19:52 – 21:20शुभ
उद्वेग21:20 – 22:48टालें
शुभ22:48 – 00:15शुभ
अमृत00:15 – 01:43शुभ
चर01:43 – 03:11सामान्य
रोग03:11 – 04:39टालें
काल04:39 – 06:07टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल06:0607:08दिन
सूर्य07:0808:09दिन
शुक्र08:0909:11दिन
बुध09:1110:12दिन
चंद्र10:1211:14दिन
शनि11:1412:15दिन
गुरु12:1513:17दिन
मंगल13:1714:18दिन
सूर्य14:1815:20दिन
शुक्र15:2016:21दिन
बुध16:2117:23दिन
चंद्र17:2318:24दिन
शनि18:2419:23रात
गुरु19:2320:21रात
मंगल20:2121:20रात
सूर्य21:2022:18रात
शुक्र22:1823:17रात
बुध23:1700:15रात
चंद्र00:1501:14रात
शनि01:1402:13रात
गुरु02:1303:11रात
मंगल03:1104:10रात
सूर्य04:1005:08रात
शुक्र05:0806:07रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
17 सित॰ 2098कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
18 सित॰ 2098कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
21 सित॰ 2098कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
23 सित॰ 2098प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
24 सित॰ 2098आश्विन अमावस्याअमावस्या
28 सित॰ 2098विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
5 अक्टू॰ 2098शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
8 अक्टू॰ 2098प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
10 अक्टू॰ 2098आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
14 अक्टू॰ 2098संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 25.2362° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।