15 मार्च 2025 को पणजी का पंचांग

शनिवार, 15 मार्च 2025, पणजी, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 15 मार्च 2025 को पणजी में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण प्रतिपदा (14:33 तक), नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी (08:54 तक) और योग गंड है। सूर्योदय 06:42 पर और सूर्यास्त 18:44 पर है। राहुकाल 09:43 से 11:13 तक है।

दिन और रात
दिन 06:42 – 18:44
रात 06:41 तक
तिथि
प्रतिपदा, 14:33 तक
द्वितीया
नक्षत्र
हस्त
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

15 मार्च 2025 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
कृष्ण प्रतिपदा 14:33 तक
कृष्ण द्वितीया 16:58, 16 मार्च तक
नक्षत्र
हस्त 11:45, 16 मार्च तक
योग
गंडअशुभ 13:59 तक
वृद्धि 14:48, 16 मार्च तक
करण
कौलव 14:33 तक
तैतिल 03:44, 16 मार्च तक
गर 16:58, 16 मार्च तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमीन
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:42
सूर्यास्त
18:44
चंद्रोदय
19:40
चंद्रास्त
07:12
दिनमान
12h 2m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
चैत्र
विक्रम संवत
2081
शक संवत
1946, क्रोधी संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:06 – 05:54
अभिजीत मुहूर्त
12:19 – 13:07

अशुभ समय

राहुकाल
09:43 – 11:13
यमगंड
14:13 – 15:44
गुलिक काल
06:42 – 08:12

15 मार्च 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल06:42 – 08:12टालें
शुभ08:12 – 09:43शुभ
रोग09:43 – 11:13टालें
उद्वेग11:13 – 12:43टालें
चर12:43 – 14:13सामान्य
लाभ14:13 – 15:44शुभ
अमृत15:44 – 17:14शुभ
काल17:14 – 18:44टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ18:44 – 20:14शुभ
उद्वेग20:14 – 21:44टालें
शुभ21:44 – 23:13शुभ
अमृत23:13 – 00:43शुभ
चर00:43 – 02:12सामान्य
रोग02:12 – 03:42टालें
काल03:42 – 05:12टालें
लाभ05:12 – 06:41शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि06:4207:42दिन
गुरु07:4208:42दिन
मंगल08:4209:43दिन
सूर्य09:4310:43दिन
शुक्र10:4311:43दिन
बुध11:4312:43दिन
चंद्र12:4313:43दिन
शनि13:4314:44दिन
गुरु14:4415:44दिन
मंगल15:4416:44दिन
सूर्य16:4417:44दिन
शुक्र17:4418:44दिन
बुध18:4419:44रात
चंद्र19:4420:44रात
शनि20:4421:44रात
गुरु21:4422:43रात
मंगल22:4323:43रात
सूर्य23:4300:43रात
शुक्र00:4301:43रात
बुध01:4302:42रात
चंद्र02:4203:42रात
शनि03:4204:42रात
गुरु04:4205:42रात
मंगल05:4206:41रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
18 मार्च 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
22 मार्च 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
25 मार्च 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
27 मार्च 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
29 मार्च 2025चैत्र अमावस्याअमावस्या
1 अप्रैल 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
8 अप्रैल 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
10 अप्रैल 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
12 अप्रैल 2025चैत्र पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां पणजी में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2091° (लाहिड़ी)। समय पणजी (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।