11 नवंबर 2000 को पटना का पंचांग

शनिवार, 11 नवंबर 2000, पटना, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 11 नवंबर 2000 को पटना में सूर्योदय के समय तिथि पूर्णिमा (02:44, 12 नव॰ तक), नक्षत्र भरणी (03:59, 12 नव॰ तक) और योग व्यतीपात है। सूर्योदय 06:04 पर और सूर्यास्त 17:02 पर है। राहुकाल 08:48 से 10:11 तक है।

दिन और रात
दिन 06:04 – 17:02
रात 06:04 तक
तिथि
पूर्णिमा, 02:44 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
भरणी, 03:59 तक
कृत्तिका
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

11 नवंबर 2000 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
पूर्णिमा 02:44, 12 नव॰ तक
कृष्ण प्रतिपदा 00:28, 13 नव॰ तक
नक्षत्र
भरणी 03:59, 12 नव॰ तक
कृत्तिका 02:25, 13 नव॰ तक
योग
व्यतीपातअशुभ 18:30 तक
वरीयान 15:35, 12 नव॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 15:44 तक
बव 02:44, 12 नव॰ तक
बालव 13:38, 12 नव॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:04
सूर्यास्त
17:02
चंद्रोदय
16:55
चंद्रास्त
05:10
दिनमान
10h 58m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2057
शक संवत
1922, विक्रम संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:20 – 05:12
अभिजीत मुहूर्त
11:11 – 11:55

अशुभ समय

राहुकाल
08:48 – 10:11
यमगंड
12:55 – 14:17
गुलिक काल
06:04 – 07:26

11 नवंबर 2000 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल06:04 – 07:26टालें
शुभ07:26 – 08:48शुभ
रोग08:48 – 10:11टालें
उद्वेग10:11 – 11:33टालें
चर11:33 – 12:55सामान्य
लाभ12:55 – 14:17शुभ
अमृत14:17 – 15:40शुभ
काल15:40 – 17:02टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ17:02 – 18:40शुभ
उद्वेग18:40 – 20:18टालें
शुभ20:18 – 21:55शुभ
अमृत21:55 – 23:33शुभ
चर23:33 – 01:11सामान्य
रोग01:11 – 02:49टालें
काल02:49 – 04:27टालें
लाभ04:27 – 06:04शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि06:0406:59दिन
गुरु06:5907:53दिन
मंगल07:5308:48दिन
सूर्य08:4809:43दिन
शुक्र09:4310:38दिन
बुध10:3811:33दिन
चंद्र11:3312:28दिन
शनि12:2813:23दिन
गुरु13:2314:17दिन
मंगल14:1715:12दिन
सूर्य15:1216:07दिन
शुक्र16:0717:02दिन
बुध17:0218:07रात
चंद्र18:0719:12रात
शनि19:1220:18रात
गुरु20:1821:23रात
मंगल21:2322:28रात
सूर्य22:2823:33रात
शुक्र23:3300:38रात
बुध00:3801:44रात
चंद्र01:4402:49रात
शनि02:4903:54रात
गुरु03:5404:59रात
मंगल04:5906:04रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
11 नव॰ 2000कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
15 नव॰ 2000संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
16 नव॰ 2000वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
19 नव॰ 2000कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
21 नव॰ 2000कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
23 नव॰ 2000प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
25 नव॰ 2000मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
30 नव॰ 2000विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
7 दिस॰ 2000शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
9 दिस॰ 2000प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां पटना में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.8691° (लाहिड़ी)। समय पटना (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।