16 नवंबर 2002 को पटना का पंचांग

शनिवार, 16 नवंबर 2002, पटना, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 16 नवंबर 2002 को पटना में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वादशी (00:03, 17 नव॰ तक), नक्षत्र उत्तरा भाद्रपद (08:30 तक) और योग वज्र है। सूर्योदय 06:07 पर और सूर्यास्त 17:00 पर है। राहुकाल 08:50 से 10:12 तक है।

दिन और रात
दिन 06:07 – 17:00
रात 06:08 तक
तिथि
द्वादशी, 00:03 तक
त्रयोदशी
नक्षत्र
रेवती
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

16 नवंबर 2002 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
शुक्ल द्वादशी 00:03, 17 नव॰ तक
शुक्ल त्रयोदशी 02:36, 18 नव॰ तक
नक्षत्र
रेवती 11:32, 17 नव॰ तक
योग
वज्रअशुभ 15:20 तक
सिद्धि 16:13, 17 नव॰ तक
करण
बव 10:45 तक
बालव 00:03, 17 नव॰ तक
कौलव 13:20, 17 नव॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:07
सूर्यास्त
17:00
चंद्रोदय
15:03
चंद्रास्त
02:43
दिनमान
10h 53m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2059
शक संवत
1924, चित्रभानु संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:22 – 05:14
अभिजीत मुहूर्त
11:12 – 11:55

अशुभ समय

राहुकाल
08:50 – 10:12
यमगंड
12:55 – 14:17
गुलिक काल
06:07 – 07:29

16 नवंबर 2002 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल06:07 – 07:29टालें
शुभ07:29 – 08:50शुभ
रोग08:50 – 10:12टालें
उद्वेग10:12 – 11:34टालें
चर11:34 – 12:55सामान्य
लाभ12:55 – 14:17शुभ
अमृत14:17 – 15:39शुभ
काल15:39 – 17:00टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ17:00 – 18:39शुभ
उद्वेग18:39 – 20:17टालें
शुभ20:17 – 21:55शुभ
अमृत21:55 – 23:34शुभ
चर23:34 – 01:12सामान्य
रोग01:12 – 02:51टालें
काल02:51 – 04:29टालें
लाभ04:29 – 06:08शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि06:0707:01दिन
गुरु07:0107:56दिन
मंगल07:5608:50दिन
सूर्य08:5009:45दिन
शुक्र09:4510:39दिन
बुध10:3911:34दिन
चंद्र11:3412:28दिन
शनि12:2813:22दिन
गुरु13:2214:17दिन
मंगल14:1715:11दिन
सूर्य15:1116:06दिन
शुक्र16:0617:00दिन
बुध17:0018:06रात
चंद्र18:0619:11रात
शनि19:1120:17रात
गुरु20:1721:23रात
मंगल21:2322:28रात
सूर्य22:2823:34रात
शुक्र23:3400:40रात
बुध00:4001:45रात
चंद्र01:4502:51रात
शनि02:5103:56रात
गुरु03:5605:02रात
मंगल05:0206:08रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
16 नव॰ 2002वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
17 नव॰ 2002प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
19 नव॰ 2002कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
24 नव॰ 2002संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
28 नव॰ 2002कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
30 नव॰ 2002कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
2 दिस॰ 2002प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
4 दिस॰ 2002मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
7 दिस॰ 2002विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
15 दिस॰ 2002शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी

तिथियां पटना में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.8972° (लाहिड़ी)। समय पटना (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।