18 नवंबर 2004 को पटना का पंचांग

गुरुवार, 18 नवंबर 2004, पटना, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 18 नवंबर 2004 को पटना में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल सप्तमी (00:11, 19 नव॰ तक), नक्षत्र श्रवण (18:10 तक) और योग वृद्धि है। सूर्योदय 06:09 पर और सूर्यास्त 16:59 पर है। राहुकाल 12:55 से 14:17 तक है।

दिन और रात
दिन 06:09 – 16:59
रात 06:09 तक
तिथि
सप्तमी, 00:11 तक
अष्टमी
नक्षत्र
श्रवण, 18:10 तक
धनिष्ठा
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

18 नवंबर 2004 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
शुक्ल सप्तमी 00:11, 19 नव॰ तक
शुक्ल अष्टमी 22:37, 19 नव॰ तक
नक्षत्र
श्रवण 18:10 तक
धनिष्ठा 17:09, 19 नव॰ तक
योग
वृद्धि 19:20 तक
ध्रुव 16:46, 19 नव॰ तक
करण
गर 13:10 तक
वणिज 00:11, 19 नव॰ तक
विष्टि (भद्रा) 11:20, 19 नव॰ तक
चंद्र राशि
मकर 05:36, 19 नव॰ तक
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:09
सूर्यास्त
16:59
चंद्रोदय
11:53
चंद्रास्त
22:53
दिनमान
10h 51m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2061
शक संवत
1926, तारण संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:23 – 05:16
अभिजीत मुहूर्त
11:12 – 11:56

अशुभ समय

राहुकाल
12:55 – 14:17
यमगंड
06:09 – 07:30
गुलिक काल
08:51 – 10:13

18 नवंबर 2004 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ06:09 – 07:30शुभ
रोग07:30 – 08:51टालें
उद्वेग08:51 – 10:13टालें
चर10:13 – 11:34सामान्य
लाभ11:34 – 12:55शुभ
अमृत12:55 – 14:17शुभ
काल14:17 – 15:38टालें
शुभ15:38 – 16:59शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत16:59 – 18:38शुभ
चर18:38 – 20:17सामान्य
रोग20:17 – 21:56टालें
काल21:56 – 23:34टालें
लाभ23:34 – 01:13शुभ
उद्वेग01:13 – 02:52टालें
शुभ02:52 – 04:31शुभ
अमृत04:31 – 06:09शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु06:0907:03दिन
मंगल07:0307:57दिन
सूर्य07:5708:51दिन
शुक्र08:5109:46दिन
बुध09:4610:40दिन
चंद्र10:4011:34दिन
शनि11:3412:28दिन
गुरु12:2813:23दिन
मंगल13:2314:17दिन
सूर्य14:1715:11दिन
शुक्र15:1116:05दिन
बुध16:0516:59दिन
चंद्र16:5918:05रात
शनि18:0519:11रात
गुरु19:1120:17रात
मंगल20:1721:23रात
सूर्य21:2322:29रात
शुक्र22:2923:34रात
बुध23:3400:40रात
चंद्र00:4001:46रात
शनि01:4602:52रात
गुरु02:5203:58रात
मंगल03:5805:04रात
सूर्य05:0406:09रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
22 नव॰ 2004शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
24 नव॰ 2004प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
26 नव॰ 2004कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
1 दिस॰ 2004संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
5 दिस॰ 2004कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
8 दिस॰ 2004कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
10 दिस॰ 2004प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
12 दिस॰ 2004मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
15 दिस॰ 2004विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
15 दिस॰ 2004धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश

तिथियां पटना में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.9252° (लाहिड़ी)। समय पटना (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।