15 नवंबर 2007 को पटना का पंचांग

गुरुवार, 15 नवंबर 2007, पटना, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 15 नवंबर 2007 को पटना में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल पंचमी (14:49 तक), नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा (10:58 तक) और योग शूल है। सूर्योदय 06:06 पर और सूर्यास्त 17:01 पर है। राहुकाल 12:55 से 14:17 तक है।

दिन और रात
दिन 06:06 – 17:01
रात 06:07 तक
तिथि
पंचमी, 14:49 तक
षष्ठी
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा, 10:58 तक
उत्तराषाढ़ा
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

15 नवंबर 2007 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
शुक्ल पंचमी 14:49 तक
शुक्ल षष्ठी 15:46, 16 नव॰ तक
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा 12:33, 16 नव॰ तक
योग
शूलअशुभ 19:37 तक
गंडअशुभ 19:09, 16 नव॰ तक
करण
बालव 14:49 तक
कौलव 03:22, 16 नव॰ तक
तैतिल 15:46, 16 नव॰ तक
चंद्र राशि
धनु 17:25 तक
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:06
सूर्यास्त
17:01
चंद्रोदय
10:37
चंद्रास्त
21:16
दिनमान
10h 55m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2064
शक संवत
1929, सर्वजित संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:21 – 05:14
अभिजीत मुहूर्त
11:12 – 11:55

अशुभ समय

राहुकाल
12:55 – 14:17
यमगंड
06:06 – 07:28
गुलिक काल
08:50 – 10:11

15 नवंबर 2007 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ06:06 – 07:28शुभ
रोग07:28 – 08:50टालें
उद्वेग08:50 – 10:11टालें
चर10:11 – 11:33सामान्य
लाभ11:33 – 12:55शुभ
अमृत12:55 – 14:17शुभ
काल14:17 – 15:39टालें
शुभ15:39 – 17:01शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत17:01 – 18:39शुभ
चर18:39 – 20:17सामान्य
रोग20:17 – 21:55टालें
काल21:55 – 23:34टालें
लाभ23:34 – 01:12शुभ
उद्वेग01:12 – 02:50टालें
शुभ02:50 – 04:28शुभ
अमृत04:28 – 06:07शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु06:0607:01दिन
मंगल07:0107:55दिन
सूर्य07:5508:50दिन
शुक्र08:5009:44दिन
बुध09:4410:39दिन
चंद्र10:3911:33दिन
शनि11:3312:28दिन
गुरु12:2813:22दिन
मंगल13:2214:17दिन
सूर्य14:1715:12दिन
शुक्र15:1216:06दिन
बुध16:0617:01दिन
चंद्र17:0118:06रात
शनि18:0619:12रात
गुरु19:1220:17रात
मंगल20:1721:23रात
सूर्य21:2322:28रात
शुक्र22:2823:34रात
बुध23:3400:39रात
चंद्र00:3901:45रात
शनि01:4502:50रात
गुरु02:5003:56रात
मंगल03:5605:01रात
सूर्य05:0106:07रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
16 नव॰ 2007वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
21 नव॰ 2007शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
22 नव॰ 2007प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
24 नव॰ 2007कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
28 नव॰ 2007संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
1 दिस॰ 2007कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
5 दिस॰ 2007कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
7 दिस॰ 2007प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
9 दिस॰ 2007मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
13 दिस॰ 2007विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां पटना में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.9670° (लाहिड़ी)। समय पटना (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।