22 अक्टूबर 2009 को पटना का पंचांग

गुरुवार, 22 अक्टूबर 2009, पटना, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 22 अक्टूबर 2009 को पटना में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्थी (10:32 तक), नक्षत्र ज्येष्ठा (00:18, 23 अक्टू॰ तक) और योग शोभन है। सूर्योदय 05:51 पर और सूर्यास्त 17:15 पर है। राहुकाल 12:59 से 14:24 तक है।

दिन और रात
दिन 05:51 – 17:15
रात 05:52 तक
तिथि
चतुर्थी, 10:32 तक
पंचमी
नक्षत्र
ज्येष्ठा, 00:18 तक
मूल
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

22 अक्टूबर 2009 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
शुक्ल चतुर्थी 10:32 तक
शुक्ल पंचमी 12:08, 23 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
ज्येष्ठा 00:18, 23 अक्टू॰ तक
मूल 02:45, 24 अक्टू॰ तक
योग
शोभन 02:25, 23 अक्टू॰ तक
अतिगंडअशुभ 02:52, 24 अक्टू॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 10:32 तक
बव 23:15 तक
बालव 12:08, 23 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
वृश्चिक 00:18, 23 अक्टू॰ तक
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:51
सूर्यास्त
17:15
चंद्रोदय
09:40
चंद्रास्त
20:14
दिनमान
11h 24m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2066
शक संवत
1931, विरोधी संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:10 – 05:01
अभिजीत मुहूर्त
11:10 – 11:56

अशुभ समय

राहुकाल
12:59 – 14:24
यमगंड
05:51 – 07:17
गुलिक काल
08:42 – 10:08

22 अक्टूबर 2009 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ05:51 – 07:17शुभ
रोग07:17 – 08:42टालें
उद्वेग08:42 – 10:08टालें
चर10:08 – 11:33सामान्य
लाभ11:33 – 12:59शुभ
अमृत12:59 – 14:24शुभ
काल14:24 – 15:50टालें
शुभ15:50 – 17:15शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत17:15 – 18:50शुभ
चर18:50 – 20:24सामान्य
रोग20:24 – 21:59टालें
काल21:59 – 23:34टालें
लाभ23:34 – 01:08शुभ
उद्वेग01:08 – 02:43टालें
शुभ02:43 – 04:17शुभ
अमृत04:17 – 05:52शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु05:5106:48दिन
मंगल06:4807:45दिन
सूर्य07:4508:42दिन
शुक्र08:4209:39दिन
बुध09:3910:36दिन
चंद्र10:3611:33दिन
शनि11:3312:30दिन
गुरु12:3013:27दिन
मंगल13:2714:24दिन
सूर्य14:2415:21दिन
शुक्र15:2116:18दिन
बुध16:1817:15दिन
चंद्र17:1518:18रात
शनि18:1819:21रात
गुरु19:2120:24रात
मंगल20:2421:28रात
सूर्य21:2822:31रात
शुक्र22:3123:34रात
बुध23:3400:37रात
चंद्र00:3701:40रात
शनि01:4002:43रात
गुरु02:4303:46रात
मंगल03:4604:49रात
सूर्य04:4905:52रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
22 अक्टू॰ 2009विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
29 अक्टू॰ 2009शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
31 अक्टू॰ 2009प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
2 नव॰ 2009कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
6 नव॰ 2009संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
10 नव॰ 2009कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
12 नव॰ 2009कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
14 नव॰ 2009प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
16 नव॰ 2009मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
16 नव॰ 2009वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
20 नव॰ 2009विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां पटना में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.9940° (लाहिड़ी)। समय पटना (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।