8 नवंबर 2011 को पटना का पंचांग

मंगलवार, 8 नवंबर 2011, पटना, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 8 नवंबर 2011 को पटना में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल त्रयोदशी (20:46 तक), नक्षत्र रेवती (01:09, 9 नव॰ तक) और योग वज्र है। सूर्योदय 06:01 पर और सूर्यास्त 17:04 पर है। राहुकाल 14:18 से 15:41 तक है।

दिन और रात
दिन 06:01 – 17:04
रात 06:02 तक
तिथि
त्रयोदशी, 20:46 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
रेवती, 01:09 तक
अश्विनी
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

8 नवंबर 2011 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
शुक्ल त्रयोदशी 20:46 तक
शुक्ल चतुर्दशी 23:19, 9 नव॰ तक
नक्षत्र
रेवती 01:09, 9 नव॰ तक
अश्विनी 04:08, 10 नव॰ तक
योग
वज्रअशुभ 21:22 तक
सिद्धि 22:16, 9 नव॰ तक
करण
कौलव 07:29 तक
तैतिल 20:46 तक
गर 10:03, 9 नव॰ तक
चंद्र राशि
मीन 01:09, 9 नव॰ तक
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:01
सूर्यास्त
17:04
चंद्रोदय
15:22
चंद्रास्त
03:42
दिनमान
11h 3m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2068
शक संवत
1933, खर संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:18 – 05:09
अभिजीत मुहूर्त
11:10 – 11:55

अशुभ समय

राहुकाल
14:18 – 15:41
यमगंड
08:47 – 10:10
गुलिक काल
11:33 – 12:55

8 नवंबर 2011 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग06:01 – 07:24टालें
उद्वेग07:24 – 08:47टालें
चर08:47 – 10:10सामान्य
लाभ10:10 – 11:33शुभ
अमृत11:33 – 12:55शुभ
काल12:55 – 14:18टालें
शुभ14:18 – 15:41शुभ
रोग15:41 – 17:04टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल17:04 – 18:41टालें
लाभ18:41 – 20:18शुभ
उद्वेग20:18 – 21:56टालें
शुभ21:56 – 23:33शुभ
अमृत23:33 – 01:10शुभ
चर01:10 – 02:47सामान्य
रोग02:47 – 04:25टालें
काल04:25 – 06:02टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल06:0106:56दिन
सूर्य06:5607:52दिन
शुक्र07:5208:47दिन
बुध08:4709:42दिन
चंद्र09:4210:37दिन
शनि10:3711:33दिन
गुरु11:3312:28दिन
मंगल12:2813:23दिन
सूर्य13:2314:18दिन
शुक्र14:1815:13दिन
बुध15:1316:09दिन
चंद्र16:0917:04दिन
शनि17:0418:09रात
गुरु18:0919:14रात
मंगल19:1420:18रात
सूर्य20:1821:23रात
शुक्र21:2322:28रात
बुध22:2823:33रात
चंद्र23:3300:38रात
शनि00:3801:43रात
गुरु01:4302:47रात
मंगल02:4703:52रात
सूर्य03:5204:57रात
शुक्र04:5706:02रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
8 नव॰ 2011प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
10 नव॰ 2011कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
15 नव॰ 2011संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
16 नव॰ 2011वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
19 नव॰ 2011कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
21 नव॰ 2011कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
23 नव॰ 2011प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
25 नव॰ 2011मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
28 नव॰ 2011विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
6 दिस॰ 2011शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी

तिथियां पटना में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.0226° (लाहिड़ी)। समय पटना (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।