27 अक्टूबर 2012 को पटना का पंचांग

शनिवार, 27 अक्टूबर 2012, पटना, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 27 अक्टूबर 2012 को पटना में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल त्रयोदशी (21:37 तक), नक्षत्र उत्तरा भाद्रपद (21:44 तक) और योग व्याघात है। सूर्योदय 05:54 पर और सूर्यास्त 17:11 पर है। राहुकाल 08:43 से 10:08 तक है।

दिन और रात
दिन 05:54 – 17:11
रात 05:55 तक
तिथि
त्रयोदशी, 21:37 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद, 21:44 तक
रेवती
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

27 अक्टूबर 2012 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
शुक्ल त्रयोदशी 21:37 तक
शुक्ल चतुर्दशी 23:17, 28 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
रेवती 23:55, 28 अक्टू॰ तक
योग
व्याघातअशुभ 14:38 तक
हर्षण 14:44, 28 अक्टू॰ तक
करण
कौलव 08:57 तक
तैतिल 21:37 तक
गर 10:24, 28 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:54
सूर्यास्त
17:11
चंद्रोदय
15:33
चंद्रास्त
03:32
दिनमान
11h 17m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2069
शक संवत
1934, नंदन संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:12 – 05:03
अभिजीत मुहूर्त
11:10 – 11:55

अशुभ समय

राहुकाल
08:43 – 10:08
यमगंड
12:57 – 14:22
गुलिक काल
05:54 – 07:19

27 अक्टूबर 2012 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल05:54 – 07:19टालें
शुभ07:19 – 08:43शुभ
रोग08:43 – 10:08टालें
उद्वेग10:08 – 11:33टालें
चर11:33 – 12:57सामान्य
लाभ12:57 – 14:22शुभ
अमृत14:22 – 15:47शुभ
काल15:47 – 17:11टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ17:11 – 18:47शुभ
उद्वेग18:47 – 20:22टालें
शुभ20:22 – 21:58शुभ
अमृत21:58 – 23:33शुभ
चर23:33 – 01:08सामान्य
रोग01:08 – 02:44टालें
काल02:44 – 04:19टालें
लाभ04:19 – 05:55शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि05:5406:51दिन
गुरु06:5107:47दिन
मंगल07:4708:43दिन
सूर्य08:4309:40दिन
शुक्र09:4010:36दिन
बुध10:3611:33दिन
चंद्र11:3312:29दिन
शनि12:2913:26दिन
गुरु13:2614:22दिन
मंगल14:2215:18दिन
सूर्य15:1816:15दिन
शुक्र16:1517:11दिन
बुध17:1118:15रात
चंद्र18:1519:18रात
शनि19:1820:22रात
गुरु20:2221:26रात
मंगल21:2622:29रात
सूर्य22:2923:33रात
शुक्र23:3300:37रात
बुध00:3701:40रात
चंद्र01:4002:44रात
शनि02:4403:47रात
गुरु03:4704:51रात
मंगल04:5105:55रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
27 अक्टू॰ 2012प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
29 अक्टू॰ 2012आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
3 नव॰ 2012संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
7 नव॰ 2012कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
10 नव॰ 2012कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
12 नव॰ 2012प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
13 नव॰ 2012कार्तिक अमावस्याअमावस्या
16 नव॰ 2012वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
17 नव॰ 2012विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
24 नव॰ 2012शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी

तिथियां पटना में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.0361° (लाहिड़ी)। समय पटना (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।